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शिक्षामित्रों ने दस हजार मानदेय का किया विरोध
mirzapur news
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:50 AM IST
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विरोध
संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षामित्र संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में समायोजित शिक्षामित्रों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पर जम कर प्रदर्शन किया। शिक्षामित्रों ने प्रदेश सरकार द्वारा वादाखिलाफी करते हुए दस हजार मानदेय देने और मूल स्कूलों पर वापसी का पुरजोर विरोध किया। धरना प्रदर्शन के बाद समायोजित शिक्षामित्रों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्रक भेजा।
जिलाध्यक्ष अजयधर दूबे ने कहा कि प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए सरकार ने वादा किया था, लेकिन अब वादाखिलाफी कर रही है। भाजपा ने चुनाव के समय शिक्षामित्रों की समस्याओं के निराकरण करने का वादा करते हुए संकल्प पत्र में शामिल किया था। विनोद कुमार सरोज ने कहा कि सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों को महज दस हजार मानदेय देते हुए उनके मूल विद्यालयों में पद स्थापित करने का निर्णय लिया जा रहा है जबकि शासन से वार्ता के दौरान इस तरह का कोई समझौता नहीं हुआ था। सुनील सिंह पटेल ने कहा कि सरकार के निर्णय का शिक्षामित्र घोर निंदा करते हैँ और मांगों को पूरा करने की मांग करते हैं। शिक्षामित्रों ने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। इस दौरान विनय सिंह, आदिशंकर, रामदेव, दुर्गा, अशोक, राजेश दूबे, दिनेश सिंह, महेश उपाध्याय, ब्रहमदेव, संदीप कुमार आदि ने सरकार की नीतियों की विरोध किया। शिक्षामित्रों ने कहा कि सरकार उनको और उनके परिवार को देखते हुए निर्णय लें, जिससे शिक्षामित्रों का अहित न हो। इस दौरान माला, संजीता, संगीता, अनिता, अल्पना, वंदना शुक्ल, साधना सिंह, इंद्र बहादुर, कृपाशंकर आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष अजयधर दूबे ने कहा कि प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए सरकार ने वादा किया था, लेकिन अब वादाखिलाफी कर रही है। भाजपा ने चुनाव के समय शिक्षामित्रों की समस्याओं के निराकरण करने का वादा करते हुए संकल्प पत्र में शामिल किया था। विनोद कुमार सरोज ने कहा कि सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों को महज दस हजार मानदेय देते हुए उनके मूल विद्यालयों में पद स्थापित करने का निर्णय लिया जा रहा है जबकि शासन से वार्ता के दौरान इस तरह का कोई समझौता नहीं हुआ था। सुनील सिंह पटेल ने कहा कि सरकार के निर्णय का शिक्षामित्र घोर निंदा करते हैँ और मांगों को पूरा करने की मांग करते हैं। शिक्षामित्रों ने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। इस दौरान विनय सिंह, आदिशंकर, रामदेव, दुर्गा, अशोक, राजेश दूबे, दिनेश सिंह, महेश उपाध्याय, ब्रहमदेव, संदीप कुमार आदि ने सरकार की नीतियों की विरोध किया। शिक्षामित्रों ने कहा कि सरकार उनको और उनके परिवार को देखते हुए निर्णय लें, जिससे शिक्षामित्रों का अहित न हो। इस दौरान माला, संजीता, संगीता, अनिता, अल्पना, वंदना शुक्ल, साधना सिंह, इंद्र बहादुर, कृपाशंकर आदि मौजूद रहे।
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