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मां विंध्यवासिनी की झलक पाने को बेताब रहे श्रद्धालु
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माघ मास एवं गुप्त नवरात्र की सप्तमी पर सोमवार को आस्थाधाम विंध्याचल में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। दर्शन पूजन के साथ ही सुबह से ही जनेऊ एवं मुंडन संस्कार कराने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। घंटा, शंख, नगाड़ा और माता के जयकारे से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। गुप्त नवरात्र की सप्तमी तिथि पर पूर्व संध्या पर ही माता के भक्तों ने डेरा डाल दिया था। भोर में गंगा में स्नान कर हाथों में नारियल, चुनरी व प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचकर माता के जयकारे करते हुए कतारबद्ध रहे। घंटों कतार में खड़े रहने के बाद देवी दरबार पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से जगत जननी के चरणों में मत्था टेककर दर्शन पूजन किया। किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में जाकर शीश नवाया। विंध्य दरबार में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़ के चलते विंध्य की गलियों एवं सड़कों पर श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। आस्था के चलते श्रद्धालु कोरोना संक्रमण व गाइड लाइन को भी भूल गए। गुप्त नवरात्रि के चलते विंध्याचल के अष्टभुजा पहाड़ी सहित पूरे क्षेत्र में जगह-जगह हवन पूजन एवं अनुष्ठान से वातावरण भक्तिमय रहा। तीर्थ पुरोहित भी अपने - अपने जजमानों को गुप्त नवरात्र की सप्तमी तिथि पर विधि विधान पूर्वक देवी पूजन अनुष्ठान कराने में व्यस्त नजर आए। मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी देवताओं के मंदिरों में जाकर भी दर्शन पूजन कर घर परिवार में सुख समृद्धि की कामना की। तत्पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने काली खोह स्थित महाकाली मंदिर और अष्टभुजी मंदिर में भी जाकर शीश झुकाया। मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
उधर, माघ मास गुप्त नवरात्र सप्तमी तिथि पर विशेष जनेऊ, मुंडन संस्कार का मुहूर्त होने पर सोमवार को सुबह से लेकर देर शाम तक विंध्याचल की सड़कों पर चारों तरफ वाहनों के चलते यातायात जाम लगा रहा। घंटों जाम में जूझते हुए श्रद्धालुओं किसी तरह से निकलकर देवी धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। विंध्याचल से बाहर निकलने के प्रयास में कई परिवार भीड़ भाड़ व धक्का-मुक्की झेलने के बाद मंदिर की सीढ़ी को स्पर्श करने के साथ ही वापस लौट गए। रविवार की रात से ही भारी संख्या में चार पहिया वाहनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। धाम के आसपास सभी होटल, धर्मशाला आदि बुक हो गए थे। विंध्य क्षेत्र के सभी वाहन स्टैंड भर गए। सुबह मंगला आरती के पश्चात कपाट खुलते ही दर्शन पूजन का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा।
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उधर, माघ मास गुप्त नवरात्र सप्तमी तिथि पर विशेष जनेऊ, मुंडन संस्कार का मुहूर्त होने पर सोमवार को सुबह से लेकर देर शाम तक विंध्याचल की सड़कों पर चारों तरफ वाहनों के चलते यातायात जाम लगा रहा। घंटों जाम में जूझते हुए श्रद्धालुओं किसी तरह से निकलकर देवी धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। विंध्याचल से बाहर निकलने के प्रयास में कई परिवार भीड़ भाड़ व धक्का-मुक्की झेलने के बाद मंदिर की सीढ़ी को स्पर्श करने के साथ ही वापस लौट गए। रविवार की रात से ही भारी संख्या में चार पहिया वाहनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। धाम के आसपास सभी होटल, धर्मशाला आदि बुक हो गए थे। विंध्य क्षेत्र के सभी वाहन स्टैंड भर गए। सुबह मंगला आरती के पश्चात कपाट खुलते ही दर्शन पूजन का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक चलता रहा।
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