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पूर्णिमा पर उमड़े आस्थावान
ब्यूरो मिर्जापुर अमर उजाला
Updated Tue, 05 May 2015 12:17 AM IST
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बुद्ध पूर्णिमा पर विंध्य दरबार में श्रद्धालुआें का रेला उमड़ पड़ा। विंध्यधाम में देश के कोने-कोने से पहुंचे नर-नारियाें ने बड़े ही श्रद्धाभाव से मत्था टेका।
घंटा-घड़ियाल, शंख व मां के जयकारे से पूरा मंदिर देवीमय हो रहा था। मंदिर के छत पर कतार में बैठे साधकों द्वारा मंत्रोच्चार बीच पूजन-पाठ, अनुष्ठान सहित शहनाई व नगाड़े के बीच मुंडन संस्कार अनवरत होता रहा।
सोमवार की भोर में मंगला आरती के उपरांत मां विंध्यवासिनी के भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव विह्वल हो उठे। विंध्य दरबार पहुंचे श्रद्धालुआें ने विधि-विधान पूर्वक मां का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की।
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विंध्याचल की न्यू वीआईपी व पुरानी वीआईपी मार्ग के साथ ही कई अन्य गलियों के रास्ते विंध्यधाम पहुंचने के लिए भक्ताें की लंबी कतारें लगी रहीं।
भक्तजन नारियल-चुनरी सहित लाचीदाना, रोरी-रक्षा, कपूर-धूपबत्ती लिए श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते हुए मंदिर की तरफ बढ़े जा रहे थे।
मां की आरती के समय कपाट बंद होने पर काफी देर तक श्रद्धालु खड़े होकर कपाट खुलने का इंतजार करते रहे। मां की आरती के उपरांत कपाट खुलते ही माता के जयकारे से पूरा विंध्यधाम गुंजायमान हो रहा था।
मंदिर परिसर में श्री पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां काली, दक्षिणमुखी हनुमान जी, श्रीराधा-कृष्ण सहित बाबा बटुक भैरव जी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को भक्ताें का तांता लगा रहा।
हवन-कुंड में आहुतियां डालने का क्रम अनवरत चलता रहा। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुआें ने त्रिकोण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
देवी मंदिर में उमड़ी आस्थावानों की भारी भीड़ के चलते सुरक्षा-व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे।
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घंटा-घड़ियाल, शंख व मां के जयकारे से पूरा मंदिर देवीमय हो रहा था। मंदिर के छत पर कतार में बैठे साधकों द्वारा मंत्रोच्चार बीच पूजन-पाठ, अनुष्ठान सहित शहनाई व नगाड़े के बीच मुंडन संस्कार अनवरत होता रहा।
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सोमवार की भोर में मंगला आरती के उपरांत मां विंध्यवासिनी के भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव विह्वल हो उठे। विंध्य दरबार पहुंचे श्रद्धालुआें ने विधि-विधान पूर्वक मां का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की।
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विंध्याचल की न्यू वीआईपी व पुरानी वीआईपी मार्ग के साथ ही कई अन्य गलियों के रास्ते विंध्यधाम पहुंचने के लिए भक्ताें की लंबी कतारें लगी रहीं।
भक्तजन नारियल-चुनरी सहित लाचीदाना, रोरी-रक्षा, कपूर-धूपबत्ती लिए श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते हुए मंदिर की तरफ बढ़े जा रहे थे।
मां की आरती के समय कपाट बंद होने पर काफी देर तक श्रद्धालु खड़े होकर कपाट खुलने का इंतजार करते रहे। मां की आरती के उपरांत कपाट खुलते ही माता के जयकारे से पूरा विंध्यधाम गुंजायमान हो रहा था।
मंदिर परिसर में श्री पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां काली, दक्षिणमुखी हनुमान जी, श्रीराधा-कृष्ण सहित बाबा बटुक भैरव जी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को भक्ताें का तांता लगा रहा।
हवन-कुंड में आहुतियां डालने का क्रम अनवरत चलता रहा। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुआें ने त्रिकोण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
देवी मंदिर में उमड़ी आस्थावानों की भारी भीड़ के चलते सुरक्षा-व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे।