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मां के दरबार में उमड़े आस्थावान
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Fri, 27 Mar 2015 12:32 AM IST
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चैत्र नवरात्र की षष्ठी और सप्तमी तिथि पर जगत जननी के दरबार में आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा।
विन्ध्यधाम की गलियां श्रद्धालुओं से ठसाठस भरी रहीं। परांबा माता भगवती के दरबार में श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धाभाव से दर्शन-पूजन किया। गंगा स्नान कर धाम पहुंचे दर्शनार्थियों ने विंध्य दरबार में मत्था टेक मंगल कामना की।
घंटा-घड़ियाल, शंख व माता के जयकारे से पूरा धाम गुंजायमान हो रहा था। मंदिर की छत पर पूजन-अनुष्ठान के साथ ही मुंडन संस्कार का दौर लगातार चलता रहा।
गुरुवार की भोर में विधि-विधान पूर्वक मां की भव्य मंगला आरती की गई।
मां की आरती के उपरांत मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर दर्शनार्थी निहाल हो उठे।
गुड़हल फूल माला सहित नारियल-चुनरी व प्रसाद लिए भक्तजन माता के दरबार पहुंचे, जहां बड़े ही श्रद्धाभाव से मत्था टेक सुख-समृद्धि के लिए कामना किया।
विंध्यधाम में भोर से ही भक्तों के आने का सिलसिला आरंभ हो गया था, जो देर रात तक चलता रहा।
किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह पहुंच कर दर्शन करने के बाद मंदिर परिसर में स्थित श्री पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां काली, मां शीतला, दक्षिणमुखी हनुमान जी, श्रीराधा-कृष्ण सहित बाबा बटुक भैरव जी के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भावविह्वल हो उठे।
विंध्याचल की न्यू वीआईपी व पुरानी वीआईपी मार्ग के साथ ही कोतवाली गली, जैपुरिया गली, बच्चा पाठक गली, पक्काघाट गली सहित कई अन्य गलियों के रास्ते मां के धाम पहुंचने के लिए नर-नारियाें की लंबी कतारें लगी रहीं।
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विंध्यधाम में पुलिस और पीएसी के जवानों के साथ ही स्काउट-गाइड व तीर्थ पुरोहित अलग-अलग शिफ्टाें में अपनी ड्यूटी को मुस्तैदी से अंजाम दे रहे थे।
मंदिर परिसर में स्थित हवन-कुंड में आहुतियां डालने का क्रम अनवरत चलता रहा। दर्शन-पूजन बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा के दौरान पहाड़ पर स्थित देवी-देवताआें के मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन की मंगलकामना की।
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विन्ध्यधाम की गलियां श्रद्धालुओं से ठसाठस भरी रहीं। परांबा माता भगवती के दरबार में श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धाभाव से दर्शन-पूजन किया। गंगा स्नान कर धाम पहुंचे दर्शनार्थियों ने विंध्य दरबार में मत्था टेक मंगल कामना की।
घंटा-घड़ियाल, शंख व माता के जयकारे से पूरा धाम गुंजायमान हो रहा था। मंदिर की छत पर पूजन-अनुष्ठान के साथ ही मुंडन संस्कार का दौर लगातार चलता रहा।
गुरुवार की भोर में विधि-विधान पूर्वक मां की भव्य मंगला आरती की गई।
मां की आरती के उपरांत मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर दर्शनार्थी निहाल हो उठे।
गुड़हल फूल माला सहित नारियल-चुनरी व प्रसाद लिए भक्तजन माता के दरबार पहुंचे, जहां बड़े ही श्रद्धाभाव से मत्था टेक सुख-समृद्धि के लिए कामना किया।
विंध्यधाम में भोर से ही भक्तों के आने का सिलसिला आरंभ हो गया था, जो देर रात तक चलता रहा।
किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह पहुंच कर दर्शन करने के बाद मंदिर परिसर में स्थित श्री पंचमुखी महादेव, मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां काली, मां शीतला, दक्षिणमुखी हनुमान जी, श्रीराधा-कृष्ण सहित बाबा बटुक भैरव जी के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भावविह्वल हो उठे।
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विंध्याचल की न्यू वीआईपी व पुरानी वीआईपी मार्ग के साथ ही कोतवाली गली, जैपुरिया गली, बच्चा पाठक गली, पक्काघाट गली सहित कई अन्य गलियों के रास्ते मां के धाम पहुंचने के लिए नर-नारियाें की लंबी कतारें लगी रहीं।
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विंध्यधाम में पुलिस और पीएसी के जवानों के साथ ही स्काउट-गाइड व तीर्थ पुरोहित अलग-अलग शिफ्टाें में अपनी ड्यूटी को मुस्तैदी से अंजाम दे रहे थे।
मंदिर परिसर में स्थित हवन-कुंड में आहुतियां डालने का क्रम अनवरत चलता रहा। दर्शन-पूजन बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा के दौरान पहाड़ पर स्थित देवी-देवताआें के मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन की मंगलकामना की।