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खेल सामग्री में लाखों का खेल, सत्यापन की तैयारी में जुटा विभाग
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मड़िहान। सरकार द्वारा चलाई जा रही कायाकल्प योजना के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में कराए गए विकास कार्यों समेत खेल सामग्री की आपूर्ति में लाखों रुपयों की अनियमितता का आरोप लगाया जा रहा है। मामला प्रकाश में आने पर कहा जा रहा है कि जांच व सत्यापन के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को ब्लाकों से विद्यालयवार सूची भेजकर सत्यापन कराया जायेगा।
चर्चा इस बात की भी है कि ब्लाक में लखनऊ की टीम जांच कर सकती है। स्कूलों के शिक्षकों से भी विकास कार्यों का सत्यापन कराने की तैयारी है। बताया जाता है कि बजट सत्र 2019-20 में कायाकल्प योजना के अंतर्गत ग्रामपंचायतों द्वारा खेलसामग्री की आपूर्ति के साथ कोटा स्टोन, इंटर लाकिंग, मिट्टी भराई, चहारदीवारी व भवन मरम्मत, पेयजल इत्यादि कार्यों को कराना दिखाया गया है। 9 भी हेराफेरी का मामला खुल सकता है। ग्रामपंचायतों में प्रधान व विकास अधिकारी के बीच खिचड़ी पकाई गयी। ग्रामीणों का दावा है कि कई विद्यालयों में काम कुछ नहीं हुआ और लाखों रुपये का हेरफेर किया गया। उदाहरण के तौर पर तोलगीं के प्राथमिक विद्यालय के शौचालय निर्माण में 24 लाख 70 हजार रुपये खर्च होना दिखाया गया है। हालांकि की खंडविकास अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने इसे मिस प्रिंट बताया। ककरद विद्यालय के डाइनिंग हाल में 65 हजार रुपये पंखा पर खर्च हो गया। वालपेंटिंग में डेढ़ लाख खर्च दिखाया गया। प्राथमिक विद्यालय गिधनहा, पड़रिया, डढ़िया समेत कई स्कूलों में एक लाख 98 हजार रुपये प्रति विद्यालय खेल सामग्री पर खर्च कर दिया गया। लेकिन धरातल पर कुछ भी नही है। हरदी मिश्र गांव के प्राथमिक विद्यालय में तीन लाख रुपये से ऊपर कोटा स्टोन पर खर्च कर दिया गया। प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक मड़िहान की चहारदीवारी की रंगाई पोताई पर 83 हजार रुपये खर्च हो गए। गोपालपुर गांव में ग्रामीणों की सुविधा के लिए शवदाह गृह पर भारी भरकम धन 18 लाख खर्च किया गया। शवदाह गृह खंडहर में तब्दील होने से एक भी शव आज तक नहीं जलाया गया। इस संबंध में खंडबविकास अधिकारी दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जांच व सत्यापन में खामियां मिली तो इसके लिए जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई के साथ रिकवरी भी की जाएगी। खंड शिक्षा अधिकारी राममिलन यादव ने बताया कि अप्रमाणित सूची मिली थी। अब प्रमाणित सूची की मांग की गई है। उपलब्ध होने के बाद ही सच सामने आ सकता है।
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चर्चा इस बात की भी है कि ब्लाक में लखनऊ की टीम जांच कर सकती है। स्कूलों के शिक्षकों से भी विकास कार्यों का सत्यापन कराने की तैयारी है। बताया जाता है कि बजट सत्र 2019-20 में कायाकल्प योजना के अंतर्गत ग्रामपंचायतों द्वारा खेलसामग्री की आपूर्ति के साथ कोटा स्टोन, इंटर लाकिंग, मिट्टी भराई, चहारदीवारी व भवन मरम्मत, पेयजल इत्यादि कार्यों को कराना दिखाया गया है। 9 भी हेराफेरी का मामला खुल सकता है। ग्रामपंचायतों में प्रधान व विकास अधिकारी के बीच खिचड़ी पकाई गयी। ग्रामीणों का दावा है कि कई विद्यालयों में काम कुछ नहीं हुआ और लाखों रुपये का हेरफेर किया गया। उदाहरण के तौर पर तोलगीं के प्राथमिक विद्यालय के शौचालय निर्माण में 24 लाख 70 हजार रुपये खर्च होना दिखाया गया है। हालांकि की खंडविकास अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने इसे मिस प्रिंट बताया। ककरद विद्यालय के डाइनिंग हाल में 65 हजार रुपये पंखा पर खर्च हो गया। वालपेंटिंग में डेढ़ लाख खर्च दिखाया गया। प्राथमिक विद्यालय गिधनहा, पड़रिया, डढ़िया समेत कई स्कूलों में एक लाख 98 हजार रुपये प्रति विद्यालय खेल सामग्री पर खर्च कर दिया गया। लेकिन धरातल पर कुछ भी नही है। हरदी मिश्र गांव के प्राथमिक विद्यालय में तीन लाख रुपये से ऊपर कोटा स्टोन पर खर्च कर दिया गया। प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक मड़िहान की चहारदीवारी की रंगाई पोताई पर 83 हजार रुपये खर्च हो गए। गोपालपुर गांव में ग्रामीणों की सुविधा के लिए शवदाह गृह पर भारी भरकम धन 18 लाख खर्च किया गया। शवदाह गृह खंडहर में तब्दील होने से एक भी शव आज तक नहीं जलाया गया। इस संबंध में खंडबविकास अधिकारी दिनेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जांच व सत्यापन में खामियां मिली तो इसके लिए जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई के साथ रिकवरी भी की जाएगी। खंड शिक्षा अधिकारी राममिलन यादव ने बताया कि अप्रमाणित सूची मिली थी। अब प्रमाणित सूची की मांग की गई है। उपलब्ध होने के बाद ही सच सामने आ सकता है।
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