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उच्च शिक्षा के ढांचे में बदलाव बेहद जरूरी
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Sat, 28 Feb 2015 12:34 AM IST
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श्रीमती इंदिरा गांधी राजकीय पीजी कालेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुक्रवार को संपन्न हो गया। वैश्विक चुनौतियां एवं उच्च शिक्षा विषय पर आयोजित सेमिनार में विद्वान वक्ताआें ने कहा कि वर्तमान उच्च शिक्षा के ढांचे और उसके विषय वस्तु में बदलाव की जरूरत है।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश के हनुमना पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. कमला प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि उच्च शिक्षित छात्र-छात्राएं वर्तमान चुनौतियों से जूझने में खुद असफल हो रहे हैं।
बोले मुंशी प्रेमचंद की पुस्तकों को पढ़े बिना पूरी शिक्षा व्यवस्था अधूरी साबित होगी।
वास्तविक शिक्षा वही है जो विद्यार्थियों के साथ समाज को प्रकाशित करे। औराई स्थित राजकीय महाविद्यालय के डा. एसएस वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र बहुत शक्तिशाली है। यदि समाज में परिवर्तन करना है तो शिक्षा में परिवर्तन जरूरी है।
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सेमिनार के दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए ललितपुर डिग्री कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. शिवशंकर यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा का स्वयं चुनौतियाें से लड़ने का एक लंबा इतिहास है।
उच्च शिक्षा में शोध और विकास के कारण ही भारतीय विद्यार्थी विश्व के कई देशाें में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं।
पैड़ापुर डिग्री कालेज की डा. मंजू यादव ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में सुधार के बिना उच्च शिक्षा में सुधार संभव नहीं है।
डा. गौरव त्रिपाठी ने कहा कि बाजारवाद के कारण उच्च शिक्षा में बदलाव बेहद आवश्यक है।
अन्य वक्ताओं में डा. सुनील श्रीवास्तव, डा. प्रेमशंकर शुक्ल, डा. राकेश राय, डा. लक्ष्मी यादव, डा. अखिलेश सिंह, राजेंद्र सिंह यादव ने भी विचार प्रस्तुत किए । कार्यक्रम के संयोजक डा. सुरेंद्र सिंह यादव ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
संचालन डा. विंध्याचल यादव ने किया। इस मौके पर डा. रीना सिंह, डा. जितेंद्र पांडेय, डा. फातिमा, सुशील, कमला शंकर, राकेश त्रिपाठी, इंद्रमणि पांडेय सहित अन्य छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश के हनुमना पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. कमला प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि उच्च शिक्षित छात्र-छात्राएं वर्तमान चुनौतियों से जूझने में खुद असफल हो रहे हैं।
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बोले मुंशी प्रेमचंद की पुस्तकों को पढ़े बिना पूरी शिक्षा व्यवस्था अधूरी साबित होगी।
वास्तविक शिक्षा वही है जो विद्यार्थियों के साथ समाज को प्रकाशित करे। औराई स्थित राजकीय महाविद्यालय के डा. एसएस वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र बहुत शक्तिशाली है। यदि समाज में परिवर्तन करना है तो शिक्षा में परिवर्तन जरूरी है।
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सेमिनार के दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए ललितपुर डिग्री कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. शिवशंकर यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा का स्वयं चुनौतियाें से लड़ने का एक लंबा इतिहास है।
उच्च शिक्षा में शोध और विकास के कारण ही भारतीय विद्यार्थी विश्व के कई देशाें में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं।
पैड़ापुर डिग्री कालेज की डा. मंजू यादव ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा में सुधार के बिना उच्च शिक्षा में सुधार संभव नहीं है।
डा. गौरव त्रिपाठी ने कहा कि बाजारवाद के कारण उच्च शिक्षा में बदलाव बेहद आवश्यक है।
अन्य वक्ताओं में डा. सुनील श्रीवास्तव, डा. प्रेमशंकर शुक्ल, डा. राकेश राय, डा. लक्ष्मी यादव, डा. अखिलेश सिंह, राजेंद्र सिंह यादव ने भी विचार प्रस्तुत किए । कार्यक्रम के संयोजक डा. सुरेंद्र सिंह यादव ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
संचालन डा. विंध्याचल यादव ने किया। इस मौके पर डा. रीना सिंह, डा. जितेंद्र पांडेय, डा. फातिमा, सुशील, कमला शंकर, राकेश त्रिपाठी, इंद्रमणि पांडेय सहित अन्य छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।