मिर्जापुर: कीड़ा मारने की दवा खाने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ी, अस्पताल में तोड़ा दम
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बच्चे की मां दवा को घोलकर पिला रही थी, इस दौरान बच्चे का नाक बंद किया था। इस कारण मौत हो सकती है।
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फाइलेरिया अभियान के तहत बच्चों को भी कीड़ा मारने की दवा दी जा रही है। मिर्जापुर जिले के रामापुर गांव में शनिवार की सुबह ढाई वर्ष के बच्चे की कीड़ा मारने की दवा खाने के बाद हालत बिगड़ गई, बाद में उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बच्चे की मां दवा को घोलकर पिला रही थी, इस दौरान बच्चे का नाक बंद किया था। इस कारण मौत हो सकती है।
12 जुलाई से फाइलेरिया अभियान के तहत गांव -गांव में आशा कार्यकर्ता घूमकर लोगों को दवा पिला रहीं। दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को कीड़ा मारने की दवा दी जा रही है। जौनपुर जिले के सुरेरी थाना क्षेत्र के भक्ति रामपुर निवासी इंद्रजीत की पत्नी नीतू अपने पुत्र ढाई वर्षीय ऋतिक और डेढ़ माह के रोशन के साथ अपने मायके पिता रामजी के घर कछवां थाना क्षेत्र के रामापुर गांव में पिछले आठ माह से रह रही है।
अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता शनिवार की सुबह रामजी के घर दवा खिलाने पहुंची। परिवार के छह सदस्यों को उम्र और लंबाई के हिसाब से फाइलेरिया की दवा दी। बालक ऋतिक को कीड़ा मारने की एक गोली दी। दवा का सेवन करने के बाद ऋतिक की हालत बिगड़ने लगी। उसे 10 से 12 उल्टी हुईं। हालत बिगड़ने पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
सूचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष अमित सिंह बालक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। जहां डाक्टर ने बालक को मृत घोषित कर दिया। बालक की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सीएचसी प्रभारी डॉ. सीबी पटेल ने बताया कि दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चा था। उसे एक गोली दी गई थी। परिवार में सभी लोगों को दवा दी गई थी। अन्य लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई। पोस्टमार्टम के बाद पता चलेगा कि बच्चे की मौत कैसे हुई।
सीएमओ डॉ. पीडी गुप्ता ने कहा कि बच्चे को कीड़ा मारने की एक गोली दी गई थी। उसकी मां दवा को पानी में घोलकर चम्मच से पिला रही थी। दवा पिलाते समय बच्चे का नाक बंद किया था। इस कारण दवा खाने की नली में न जाकर सांस की नली में चली गई होगी। इस कारण मौत हो सकती है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण की पुष्टि होगी।