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शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:32 AM IST
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अचानक शीतलहर बढ़ने से रविवार को जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। ठिठुरन बढ़ने से जहां एक ओर लोग जगह-जगह जले अलाव तापते नजर आए, वहीं आसमान में बादल छाए होने के कारण भगवान भास्कर लुका-छिपी का खेल खेलते रहे।
हाड़कंपाती सर्दी ने जहां एक ओर लोगों को अपने-अपने घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया, वहीं सड़कों और बाजारों में सियापा रहा।
नगरीय इलाके सहित जनपद के ग्रामीण अंचलों में भी रविवार को शीतलहर के तेज होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। पालिका प्रशासन की तरफ से नगर में अलाव जलवाने की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन वह नाकाफी रही।
कड़ाके की ठंड पड़ने से और छुट्टी का दिन होने के कारण लोग अपने-अपने घरों में कैद रहे, वहीं रविवार को नगर के प्रमुख बाजारों एवं सड़काें पर चहुंओर सियापा पसरा रहा।
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सड़क के किनारे लगने वाले ठेला-खोमचा और रिक्शाचालक भी इक्का-दुक्का ही नजर आए। बाजारों में स्थित चाय की दुकानों पर पहुंचे लोग चाय की चुस्की लेते दिखाई दिए।
सुबह से दोपहर बाद तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं होने से सर्द का एहसास कुछ ज्यादा ही असर दिखा रहा था।
अलाव जलाने के लिए जलवानी लकड़ी की दुकानों पर ग्राहक डटे रहे, वहीं जरूरी कार्यवश घरों से बाहर निकलने वाले लोग अपने पूरे शरीर को गर्म परिधानों से ढककर ही बाहर निकलना मुनासिब समझे।
शीतलहर के चलते से जनपद के ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह अलाव जलवाकर ग्रामीण तापते नजर आए।
गलन और ठिठुरन के चलते सांयकाल छह बजे के बाद से ही सड़कों व बाजारों में सन्नाटा दिखाई देने लगा था, वहीं रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर यात्रीगण भी नदारद दिखाई दिए।
सांयकाल घरों से बाहर निकलने वाले अपने पूरे शरीर पर गर्म परिधान पहनकर ही बाहर निकले।
हाड़कंपाती सर्दी ने जहां एक ओर लोगों को अपने-अपने घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया, वहीं सड़कों और बाजारों में सियापा रहा।
नगरीय इलाके सहित जनपद के ग्रामीण अंचलों में भी रविवार को शीतलहर के तेज होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। पालिका प्रशासन की तरफ से नगर में अलाव जलवाने की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन वह नाकाफी रही।
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कड़ाके की ठंड पड़ने से और छुट्टी का दिन होने के कारण लोग अपने-अपने घरों में कैद रहे, वहीं रविवार को नगर के प्रमुख बाजारों एवं सड़काें पर चहुंओर सियापा पसरा रहा।
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सड़क के किनारे लगने वाले ठेला-खोमचा और रिक्शाचालक भी इक्का-दुक्का ही नजर आए। बाजारों में स्थित चाय की दुकानों पर पहुंचे लोग चाय की चुस्की लेते दिखाई दिए।
सुबह से दोपहर बाद तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं होने से सर्द का एहसास कुछ ज्यादा ही असर दिखा रहा था।
अलाव जलाने के लिए जलवानी लकड़ी की दुकानों पर ग्राहक डटे रहे, वहीं जरूरी कार्यवश घरों से बाहर निकलने वाले लोग अपने पूरे शरीर को गर्म परिधानों से ढककर ही बाहर निकलना मुनासिब समझे।
शीतलहर के चलते से जनपद के ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह अलाव जलवाकर ग्रामीण तापते नजर आए।
गलन और ठिठुरन के चलते सांयकाल छह बजे के बाद से ही सड़कों व बाजारों में सन्नाटा दिखाई देने लगा था, वहीं रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर यात्रीगण भी नदारद दिखाई दिए।
सांयकाल घरों से बाहर निकलने वाले अपने पूरे शरीर पर गर्म परिधान पहनकर ही बाहर निकले।