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ठिठुरकर बसों का इंतजार कर रहे बस यात्री
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मिर्जापुर। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में रैन बसेरा को तत्काल संचालित करने का आदेश दिया है लेकिन नगर में अभी इस पर काम नहीं हो सका है। अब ठंड भी बढ़ रही है लेकिन रैन बसेरा नहीं बन सका है। नगर में रैन बसेरा की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद की है। लेकिन नगर पालिका परिषद अभी तक इसकी तैयारी नहीं कर सकी है।
नवंबर का पहला पखवाड़ा अब समाप्त होने को है। अब सुबह और शाम के साथ ही रात में अधिक ठंड हो रही है। नगर में अधिकतर लोगों ने कुछ गर्म कपड़े भी निकाल लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात ही अलग है। वहां तो अब पर्याप्त ठंड पड़ रही है लेकिन इसी के साथ ही गरीबों की सम्रस्या भी शुरू हो रही है। नगर क्षेत्र में प्रतिवर्ष तीन रैन बसेरा नगर पालिका की तरफ से बनवाए जाते हैं। लेकिन अभी तक इसके लिए तैयारी नहीं की गई है।
लोगों का कहना है कि यदि ठंड इसी प्रकार बढ़ती रही तो शीघ्र ही रैन बसेरे की जरूरत पड़ सकती है। नगर में रोडवेज परिसर के पीछे तथा विंध्याचल में बरतर के पास रैन बसेरा नगर पालिका की ओर से बनवाया जाता है। इसके बाद यदि लोगों की संख्या अधिक होती है तो घंटाघर स्थित स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय परिसर में अतिरिक्त रैन बसेरा बनवाया जाता है। रोडवेज परिसर के पास व बरतर के पास वाले रैन बसेरा में प्राथमिक तौर पर 50 बेड वाला रैन बसेरा बनवाया जाता है। लेकिन यह अभी तक तैयार नहीं हो सका है। नागरिकों का कहना है कि रैन बसेरा बन जाने से कम से कम रिक्शा चालक, ठेला चालक या दूर दराज से आने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा।
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विंध्याचल में कागजों पर संचालित हो रहा रैन बसेरा
विंध्याचल। विंध्य धाम क्षेत्र में रैन बसेरा सिर्फ सरकारी कागजों पर संचालित हो रहा है। कहने को तो आस्थाधाम में लगभग आधा दर्जन रैन बसेरा हैं। लेकिन वर्तमान समय में सभी के दरवाजों पर ताला लटक रहा है। दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों सहित गरीब और असहाय लोगों को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे ही रात गुजारनी पड़ रही है। विंध्याचल के बरतर तिराहा सहित रोडवेज परिसर, कालीखोह माता मंदिर के समीप, गेरुआ तालाब और अष्टभुजा पहाड़ी मंदिर के ऊपर रैन बसेरा बनवाए गए हैं। उसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले में नगर पालिका परिषद, के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि रैन बसेरा की तैयारी की जा रही है। उसके लिए कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है। दो-तीन दिनों में रैन बसेरा तैयार हो जाएगा।
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नवंबर का पहला पखवाड़ा अब समाप्त होने को है। अब सुबह और शाम के साथ ही रात में अधिक ठंड हो रही है। नगर में अधिकतर लोगों ने कुछ गर्म कपड़े भी निकाल लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात ही अलग है। वहां तो अब पर्याप्त ठंड पड़ रही है लेकिन इसी के साथ ही गरीबों की सम्रस्या भी शुरू हो रही है। नगर क्षेत्र में प्रतिवर्ष तीन रैन बसेरा नगर पालिका की तरफ से बनवाए जाते हैं। लेकिन अभी तक इसके लिए तैयारी नहीं की गई है।
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लोगों का कहना है कि यदि ठंड इसी प्रकार बढ़ती रही तो शीघ्र ही रैन बसेरे की जरूरत पड़ सकती है। नगर में रोडवेज परिसर के पीछे तथा विंध्याचल में बरतर के पास रैन बसेरा नगर पालिका की ओर से बनवाया जाता है। इसके बाद यदि लोगों की संख्या अधिक होती है तो घंटाघर स्थित स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय परिसर में अतिरिक्त रैन बसेरा बनवाया जाता है। रोडवेज परिसर के पास व बरतर के पास वाले रैन बसेरा में प्राथमिक तौर पर 50 बेड वाला रैन बसेरा बनवाया जाता है। लेकिन यह अभी तक तैयार नहीं हो सका है। नागरिकों का कहना है कि रैन बसेरा बन जाने से कम से कम रिक्शा चालक, ठेला चालक या दूर दराज से आने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा।
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विंध्याचल में कागजों पर संचालित हो रहा रैन बसेरा
विंध्याचल। विंध्य धाम क्षेत्र में रैन बसेरा सिर्फ सरकारी कागजों पर संचालित हो रहा है। कहने को तो आस्थाधाम में लगभग आधा दर्जन रैन बसेरा हैं। लेकिन वर्तमान समय में सभी के दरवाजों पर ताला लटक रहा है। दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों सहित गरीब और असहाय लोगों को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे ही रात गुजारनी पड़ रही है। विंध्याचल के बरतर तिराहा सहित रोडवेज परिसर, कालीखोह माता मंदिर के समीप, गेरुआ तालाब और अष्टभुजा पहाड़ी मंदिर के ऊपर रैन बसेरा बनवाए गए हैं। उसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले में नगर पालिका परिषद, के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि रैन बसेरा की तैयारी की जा रही है। उसके लिए कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है। दो-तीन दिनों में रैन बसेरा तैयार हो जाएगा।