{"_id":"66b921984a0e244dfc002a37","slug":"bulldozers-ran-at-two-prayer-sites-on-reserved-land-of-jungle-mahal-mirzapur-news-c-192-1-svns1033-120481-2024-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mirzapur News: जंगल महाल की आरक्षित भूमि पर बने दो प्रार्थना स्थलों पर चला बुलडोजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mirzapur News: जंगल महाल की आरक्षित भूमि पर बने दो प्रार्थना स्थलों पर चला बुलडोजर
विज्ञापन
अहरौरा। जंगल महाल स्थित कुम्हिया तथा बेलखरा की वन भूमि पर बने दो प्रार्थना स्थलों को रविवार को पुलिस अधीक्षक अभिनंदन तथा एसडीएम चुनार राजेश कुमार वर्मा की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। अतिक्रमण एवं अवैध कब्जा के इस मामले में वन तथा राजस्व कर्मियों की तरफ से आरोपियों के खिलाफ बीते नवंबर माह में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए थे।
शासन को खुफिया जानकारी मिली थी कि जमालपुर ब्लॉक में अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से सरकारी पहाड़ खाते, वन तथा राजस्व की जमीन कब्जा करके एक दशक से प्रार्थना स्थल का निर्माण कराकर मतांतरण कराया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शासनस्तर से जांच कराई गई। उधर, वन तथा राजस्व कर्मियों द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने जंगल महाल के कुम्हिया, बेलखरा में बने प्रार्थना स्थल का अभिलेखीय साक्ष्य संकलित किया। जिसमें अवैध रूप से कब्जा करके प्रार्थना स्थल का निर्माण कराकर मतांतरण का मामला सामने आया। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ वन तथा राजस्व कर्मियों की ओर से बीते नवंबर माह में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए थे।रविवार को पुलिस अधीक्षक अभिनंदन, एसडीएम चुनार राजेश कुमार वर्मा की मौजूदगी में जंगल महाल के कुम्हिया तथा बेलखरा की वन भूमि पर बनवाए गए प्रार्थना स्थल को बुलडोजर से गिरा दिया गया। इस दौरान तहसीलदार चुनार, राजस्व कर्मियों के अलावा राजगढ़, चुनार, जमालपुर, अदलहाट तथा अहरौरा थाने की पुलिस मौजूद रही। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन का कहना है कि प्रार्थना स्थल बनवाकर गांव के भोले-भाले लोगों का धर्मांतरण कराने की सूचना मिली थी। जांच में पता चला कि जंगल महाल की वन भूमि पर अवैध रूप से प्रार्थना स्थल का निर्माण कराया गया है। इस मामले में मुकदमा भी पंजीकृत है। बहुत ही सुनियोजित ढंग से इस काम को किया जा रहा था। इस तरह की और अवैध संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। आगे भी कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम चुनार राजेश कुमार वर्मा का कहना है कि चुनार रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में हुए अनधिकृत कब्जे को हटाया गया है। कब्जा करने वालों को वन अधिकारी की रिपोर्ट पर नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए अवसर प्रदान किया गया। कब्जा स्थल पर नोटिस चस्पा किया गया, लेकिन कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद सात दिन के अंदर जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद जमीन खाली नहीं की गई। इसके बाद वन विभाग की जमीन को राजस्व तथा पुलिस प्रशासन की तरफ से बलपूर्वक खाली कराया गया है। बेदखली की कार्रवाई में खर्च की वसूली भी कराई जाएगी।
विज्ञापन
शासन को खुफिया जानकारी मिली थी कि जमालपुर ब्लॉक में अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से सरकारी पहाड़ खाते, वन तथा राजस्व की जमीन कब्जा करके एक दशक से प्रार्थना स्थल का निर्माण कराकर मतांतरण कराया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शासनस्तर से जांच कराई गई। उधर, वन तथा राजस्व कर्मियों द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने जंगल महाल के कुम्हिया, बेलखरा में बने प्रार्थना स्थल का अभिलेखीय साक्ष्य संकलित किया। जिसमें अवैध रूप से कब्जा करके प्रार्थना स्थल का निर्माण कराकर मतांतरण का मामला सामने आया। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ वन तथा राजस्व कर्मियों की ओर से बीते नवंबर माह में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए थे।रविवार को पुलिस अधीक्षक अभिनंदन, एसडीएम चुनार राजेश कुमार वर्मा की मौजूदगी में जंगल महाल के कुम्हिया तथा बेलखरा की वन भूमि पर बनवाए गए प्रार्थना स्थल को बुलडोजर से गिरा दिया गया। इस दौरान तहसीलदार चुनार, राजस्व कर्मियों के अलावा राजगढ़, चुनार, जमालपुर, अदलहाट तथा अहरौरा थाने की पुलिस मौजूद रही। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन का कहना है कि प्रार्थना स्थल बनवाकर गांव के भोले-भाले लोगों का धर्मांतरण कराने की सूचना मिली थी। जांच में पता चला कि जंगल महाल की वन भूमि पर अवैध रूप से प्रार्थना स्थल का निर्माण कराया गया है। इस मामले में मुकदमा भी पंजीकृत है। बहुत ही सुनियोजित ढंग से इस काम को किया जा रहा था। इस तरह की और अवैध संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। आगे भी कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम चुनार राजेश कुमार वर्मा का कहना है कि चुनार रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में हुए अनधिकृत कब्जे को हटाया गया है। कब्जा करने वालों को वन अधिकारी की रिपोर्ट पर नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए अवसर प्रदान किया गया। कब्जा स्थल पर नोटिस चस्पा किया गया, लेकिन कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद सात दिन के अंदर जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद जमीन खाली नहीं की गई। इसके बाद वन विभाग की जमीन को राजस्व तथा पुलिस प्रशासन की तरफ से बलपूर्वक खाली कराया गया है। बेदखली की कार्रवाई में खर्च की वसूली भी कराई जाएगी।
विज्ञापन