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सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण का एकमात्र रास्ता बौद्ध दर्शन: प्रो. अमिताभ

Thu, 16 Jul 2026 01:13 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:13 AM IST
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Buddhist philosophy is the only path to sustainable development and environmental conservation: Prof. Amitabh.
केबी कालेज के बीएड विभाग में आयोजित सात दिवसीय बोधि-पथ कार्यशाला को संबो​धित ​करते वक्ता, सोशल
सात दिवसीय ''बोधि-पथ'' कार्यशाला के दूसरे दिन पर्यावरण और बौद्ध दर्शन पर हुआ मंथन
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मिर्जापुर। केबीपीजी कॉलेज और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ''बोधि-पथ'' कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को पर्यावरण और बौद्ध दर्शन पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि बौद्ध दर्शन मानव को प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा मानता है।
''सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण'' विषय पर केंद्रित कार्यशाला के मुख्य वक्ता मध्यकालीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अमिताभ तिवारी रहे। कहा कि बौद्ध विचार आधुनिक भौतिकवादी और अत्यधिक उपभोग आधारित जीवनशैली की आलोचना करता है। इसके विपरीत यह दर्शन संतुलित, सचेत और मर्यादित जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है। विशिष्ट वक्ता एवं प्रबोधिनी संस्था के संस्थापक निदेशक विभूति कुमार मिश्रा ने कहा कि बौद्ध दर्शन में प्रकृति और मानव का संबंध परस्पर निर्भरता, सह-अस्तित्व और गहरे नैतिक जुड़ाव पर आधारित है। अध्यक्षता करते हुए शिक्षा संकाय के अध्यक्ष प्रो. भवभूति मिश्रा ने कहा कि बुद्ध का संदेश पूरी तरह प्रकृति के संरक्षण, अंतर्निर्भरता और पर्यावरण संतुलन पर आधारित है। वर्तमान वैश्विक संकटों का समाधान बौद्ध जीवन दर्शन में समाहित है। संचालन डॉ. कुलदीप पांडेय ने किया। सत्र के अंत में प्रोफेसर भानु प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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इस अवसर पर संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. अर्चना पांडेय, प्रो. नम्रता मिश्रा, डॉ. करनैल सिंह, डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह, डॉ. अमोद कुमार, डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. सतीश चंद्र वर्मा सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और शिक्षा संकाय के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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