थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद होंगे बाबा विश्वनाथ के दर्शन, बगैर मास्क लगाए नहीं मिलेगा प्रवेश
- हर घंटे लगाया जाएगा मंदिर में पोछा, चार-चार घंटे पर होगा सैनिटाइजेशन
- शरीर का तापमान ज्यादा होने जैसे कोरोना संदिग्ध लक्षण मिलने पर नहीं मिलेगा प्रवेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना वायरस के कारण बंद मंदिरों के कपाट 8 जून से खुल जाएंगे। काशीपुराधिपति के दरबार में थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद ही प्रवेश मिलेगा। बिना मास्क लगाए मंदिर में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
भक्तों को बाबा का झांकी दर्शन ही मिलेगा, स्पर्श दर्शन की सुविधा किसी को नहीं होगी। उधर, श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि आठ जून को जो मंदिर खुल रहे हैं, वहां की व्यवस्था, आवश्यकता, जरूरत को देखने-समझने के बाद विंध्याचल धाम खोलने पर विचार करेंगे। शुभ मुहूर्त देखकर ही कपाट खोला जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों के लिए चरण स्पर्श पर प्रतिबंध रहेगा।
शासन के निर्देश पर शर्तों के साथ 8 जून से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे। थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए 10 श्रद्धालुओं को एक बार में प्रवेश दिया जाएगा। दो-दो मीटर पर मंदिर परिसर में गोले बनाए जाएंगे, जिसमें श्रद्धालु खड़े होंगे। हैंड और बॉडी सैनिटाइज करने के बाद ही भक्त मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।
इसके लिए साबुन और हैंड सैनिटाइजर रखे जाएंगे। मंदिर परिसर में हर घंटे पर पोछा लगाया जाएगा और चार-चार घंटे पर परिसर को सैनिटाइज किया जाएगा। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में 8 जून से नियमों के साथ प्रवेश दिया जाएगा।
मंदिरों में प्रवेश करने वाले भक्तों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। जिस श्रद्धालु के शरीर का तापमान अधिक होगा, उसे मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ समेत अन्य मंदिरों में 20 मार्च से ही आम दर्शनार्थियों के प्रवेश पर रोक लगी है।
मिर्जापुर में श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने मंगलवार की दोपहर समाज की बैठक के बाद कहा कि आठ जून को पहले जो मंदिर खुल रहे हैं, वहां की व्यवस्था, आवश्यकता, जरूरत को देखने, समझने के बाद विंध्याचल धाम खोलने पर विचार किया जा रहा है। कहा कि जिलाधिकारी के माध्यम से शासन की गाइड लाइन मिलने पर उसी के अनुरूप मंदिर के पट खोले जाएंगे।
मां विंध्यवासिनी मंदिर प्रांगण, गलियों में भी सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा। मां विंध्यवासिनी मंदिर गर्भगृह में आम भक्तों के लिए चरण स्पर्श पर प्रतिबंध रहेगा। जबकि जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने बताया कि श्री विंध्य पंडा समाज के साथ बैठक कर मंदिर का पट खोलने पर मंथन होगा।
फिर निर्णय लिया जाएगा। उधर, ऐसे में आठ जून को विंध्याचल मंदिर का पट खुलेगा या नहीं, इसको लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है। गौरतलब है कि 22 मार्च को दोपहर 2 बजे आरती करने के बाद से मंदिर के पट बंद चल रहे हैं।