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अश्वगंधा, सतावर और काला मेघ की खेती पर जोर
ब्यूरो, अमर उजाला,मिर्जापुर
Updated Tue, 30 Jun 2015 12:19 AM IST
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साउथ कैंपस के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सोमवार को सांसद आदर्श ग्राम ददरी में पूर्व खरीफ किसान मेला एवं किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ की फसल के अलावा औद्यानिक और औषधीय खेती के बारे में विस्तार से बताया।
क्षेत्र को औषधीय खेती के लिए उपयुक्त बताते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा, सतावर, काला मेघ, एलोवेरा तथा घृतकुमारी आदि औषधीय खेती करने पर जोर दिया।
हलिया ब्लाक के आदर्श ग्राम ददरी स्थित हनुमान कुटी परिसर में आयोजित पूर्व खरीफ किसान मेला व किसान सम्मेलन में किसानों को खेती-किसानी की जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम का शुभारंभ और अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह ने भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी के चित्र पर माल्यार्पण किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सांसद अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कृषि उत्पादन का समुचित प्रबंध किए बगैर किसी गांव का पूर्ण विकास नहीं हो सकता है। सांसद ने कहा कि किसान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई जानकारी को अपने कृषि कार्य में अपनाएं, जिससे पैदावार बढ़ सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों को उन्नतशील धान की प्रजातियों की बुआई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धान की अच्छी पैदावार के लिए किसान मृदा परीक्षण जरूर करवा लें। कृषि वैज्ञानिक डा. जेपी राय ने कहा कि भरपूर फसल पैैदावार के लिए पर्याप्त फसल सुरक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पौध पोषण के लिए गुणवत्ता युक्त मृदा शोधन भी अति आवश्यक है। अकार्बनिक पदार्थ से ही नहीं बल्कि कार्बनिक पदार्थों से भी पौधों को भरपूर पोषण मिलता है। कृषि वैज्ञानिक प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि क्षेत्र की काली मिट्टी नीबू, बेल, संतरा के उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि इस इलाके में आंवला व आम की भी खेती की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिक डा. आनंद ने कहा कि प्राचीन काल में विंध्य क्षेत्र के जंगल और पहाड़ औषधीय पौधों से आच्छादित थे। उन्होंने अश्वगंधा, सतावर, काला मेघ, एलोवेरा तथा घृतकुमारी आदि औषधीय पौधों की खेती पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसान पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्र दूूबे ने कहा कि किसानों को औद्यानिक पौधों की खेती के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
किसान सम्मेलन का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक प्रो. गुरु प्रसाद सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान ग्राम के पांच बुजुर्गों को सांसद अनुप्रिया पटेल ने सम्मानित किया तथा किसानों का स्वागत कृषि वैज्ञानिक प्रो. श्रीराम सिंह ने किया।
इस दौरान बीडीओ मोहन लाल जायसवार, ग्राम प्रधान विजय कुमार शर्मा, रमाकांत पटेल, डा. एसपी पटेल, लाल बहादुर सिंह, जनक शास्त्री सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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क्षेत्र को औषधीय खेती के लिए उपयुक्त बताते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा, सतावर, काला मेघ, एलोवेरा तथा घृतकुमारी आदि औषधीय खेती करने पर जोर दिया।
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हलिया ब्लाक के आदर्श ग्राम ददरी स्थित हनुमान कुटी परिसर में आयोजित पूर्व खरीफ किसान मेला व किसान सम्मेलन में किसानों को खेती-किसानी की जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम का शुभारंभ और अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह ने भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी के चित्र पर माल्यार्पण किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सांसद अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कृषि उत्पादन का समुचित प्रबंध किए बगैर किसी गांव का पूर्ण विकास नहीं हो सकता है। सांसद ने कहा कि किसान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई जानकारी को अपने कृषि कार्य में अपनाएं, जिससे पैदावार बढ़ सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों को उन्नतशील धान की प्रजातियों की बुआई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धान की अच्छी पैदावार के लिए किसान मृदा परीक्षण जरूर करवा लें। कृषि वैज्ञानिक डा. जेपी राय ने कहा कि भरपूर फसल पैैदावार के लिए पर्याप्त फसल सुरक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पौध पोषण के लिए गुणवत्ता युक्त मृदा शोधन भी अति आवश्यक है। अकार्बनिक पदार्थ से ही नहीं बल्कि कार्बनिक पदार्थों से भी पौधों को भरपूर पोषण मिलता है। कृषि वैज्ञानिक प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि क्षेत्र की काली मिट्टी नीबू, बेल, संतरा के उत्पादन के लिए बहुत उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि इस इलाके में आंवला व आम की भी खेती की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिक डा. आनंद ने कहा कि प्राचीन काल में विंध्य क्षेत्र के जंगल और पहाड़ औषधीय पौधों से आच्छादित थे। उन्होंने अश्वगंधा, सतावर, काला मेघ, एलोवेरा तथा घृतकुमारी आदि औषधीय पौधों की खेती पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसान पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्र दूूबे ने कहा कि किसानों को औद्यानिक पौधों की खेती के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
किसान सम्मेलन का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक प्रो. गुरु प्रसाद सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान ग्राम के पांच बुजुर्गों को सांसद अनुप्रिया पटेल ने सम्मानित किया तथा किसानों का स्वागत कृषि वैज्ञानिक प्रो. श्रीराम सिंह ने किया।
इस दौरान बीडीओ मोहन लाल जायसवार, ग्राम प्रधान विजय कुमार शर्मा, रमाकांत पटेल, डा. एसपी पटेल, लाल बहादुर सिंह, जनक शास्त्री सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।