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अड़गड़ानंद जी ने बहाई ज्ञान की गंगा
ब्यूरो मिर्जापुर अमर उजाला
Updated Mon, 15 Jun 2015 12:34 AM IST
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क्षेत्र के बरैनी गांव, सेमरी चौराहा स्थित पप्पू सिंह के हाता में रविवार को स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी का प्रवचन सुनने भक्तों का रेला उमड़ पड़ा।
प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से भक्ति और ज्ञान की अविरल गंगा बहाई। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
भव्य पंडाल में बने मंच से महाराज जी ने अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद प्रवचन का शुभारंभ किया। स्वामी जी के प्रवचन सुनने पूर्वांचल के कई जिलों सहित दूसरे प्रांतों से लोग पहुंचे थे।
प्रवचन के दौरान स्वामी अड़गड़ानंद जी ने गीता और यथार्थ गीता के अंतर को बताते हुए कहा कि गीता के विषय में जितनी टीका लिखी गई है, वह पूर्ण नहीं है।
स्वामी जी ने कहा कि भागवत गीता भगवान श्रीकृष्ण के मुख से बोली गई वाणी है, इसको श्रवण करने वाला अर्जुन जैसा साधक था। गीता को समझने के किए ज्ञान की आवश्यकता होती है और ज्ञान के समान नि:संदेह कोई योग नहीं है।
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महाराज जी ने कहा कि ब्राम्हण को धैर्यवान होना चाहिए तथा दान देते समय धैर्य का परिचय देना चाहिए। कहा कि ईश्वर का ध्यान किसी भी समय और कोई भी कार्य करते समय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तत्व दर्शन ही ज्ञान है, ज्ञान गीता से ही प्राप्त होता है।
यथार्थ गीता का अध्ययन सभी को करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि हिंदु धर्म एक विचार और एक सिद्धांत है और सबसे पुरातन है। यह धर्म सबसे पुरानी सभ्यता का परिचालक है।
इसके पूर्व स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी का काफिला रविवार को सक्तेशगढ़-चुनार मार्ग से होते हुुए कछवां कार्यक्रम स्थल पर पूर्वान्ह साढ़े ग्यारह बजे पहुंचा।
स्वामी जी ने भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद प्रवचन का शुभारंभ किया। निजी साधनों से आने वाले लोगों के लिए एक तरफ मैदान में वाहनों को खड़े करने की व्यवस्था की गई थी, वहीं दूरदराज से आए भक्तों की सेवा करने में लोग तल्लीनता से जुटे रहे।
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी का प्रवचन सुनने के लिए पूर्वांचल के कई जनपदों के अलावा बिहार, मुंबई, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि प्रांतों से भक्तजन पहुंचे थे।
कार्यक्रम स्थल पर विशाल भंडारे का शुभारंभ साढ़े ग्यारह बजे से शुरू होकर सांयकाल सात बजे तक अनवरत चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रवचन सुनने उमड़ी भीड़ के चलते कछवां बाजार से बरैनी गांव तक भक्त ही भक्त नजर आ रहे थे।
इस दौरान सोहन बाबा, गोविंद बाबा, कौशल बाबा, बद्री बाबा, संते महाराज, बच्चा बाबा, राकेश बाबा, तानसेन बाबा, बिल्लू बाबा, संजय बाबा, तिवारी बाबा, लाले बाबा, तुलसी बाबा आदि मौजूद रहे।
इस दौरान आयोजक पप्पू सिंह व दिनेश सिंह सहित रामबाबू सिंह, राजकुमार उपाध्याय, मुरारी सिंह, अजय उपाध्याय, अरूण सिंह, रामजी उस्ताद सहित बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।
प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से भक्ति और ज्ञान की अविरल गंगा बहाई। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
भव्य पंडाल में बने मंच से महाराज जी ने अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद प्रवचन का शुभारंभ किया। स्वामी जी के प्रवचन सुनने पूर्वांचल के कई जिलों सहित दूसरे प्रांतों से लोग पहुंचे थे।
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प्रवचन के दौरान स्वामी अड़गड़ानंद जी ने गीता और यथार्थ गीता के अंतर को बताते हुए कहा कि गीता के विषय में जितनी टीका लिखी गई है, वह पूर्ण नहीं है।
स्वामी जी ने कहा कि भागवत गीता भगवान श्रीकृष्ण के मुख से बोली गई वाणी है, इसको श्रवण करने वाला अर्जुन जैसा साधक था। गीता को समझने के किए ज्ञान की आवश्यकता होती है और ज्ञान के समान नि:संदेह कोई योग नहीं है।
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महाराज जी ने कहा कि ब्राम्हण को धैर्यवान होना चाहिए तथा दान देते समय धैर्य का परिचय देना चाहिए। कहा कि ईश्वर का ध्यान किसी भी समय और कोई भी कार्य करते समय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तत्व दर्शन ही ज्ञान है, ज्ञान गीता से ही प्राप्त होता है।
यथार्थ गीता का अध्ययन सभी को करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि हिंदु धर्म एक विचार और एक सिद्धांत है और सबसे पुरातन है। यह धर्म सबसे पुरानी सभ्यता का परिचालक है।
इसके पूर्व स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी का काफिला रविवार को सक्तेशगढ़-चुनार मार्ग से होते हुुए कछवां कार्यक्रम स्थल पर पूर्वान्ह साढ़े ग्यारह बजे पहुंचा।
स्वामी जी ने भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद प्रवचन का शुभारंभ किया। निजी साधनों से आने वाले लोगों के लिए एक तरफ मैदान में वाहनों को खड़े करने की व्यवस्था की गई थी, वहीं दूरदराज से आए भक्तों की सेवा करने में लोग तल्लीनता से जुटे रहे।
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी का प्रवचन सुनने के लिए पूर्वांचल के कई जनपदों के अलावा बिहार, मुंबई, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि प्रांतों से भक्तजन पहुंचे थे।
कार्यक्रम स्थल पर विशाल भंडारे का शुभारंभ साढ़े ग्यारह बजे से शुरू होकर सांयकाल सात बजे तक अनवरत चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रवचन सुनने उमड़ी भीड़ के चलते कछवां बाजार से बरैनी गांव तक भक्त ही भक्त नजर आ रहे थे।
इस दौरान सोहन बाबा, गोविंद बाबा, कौशल बाबा, बद्री बाबा, संते महाराज, बच्चा बाबा, राकेश बाबा, तानसेन बाबा, बिल्लू बाबा, संजय बाबा, तिवारी बाबा, लाले बाबा, तुलसी बाबा आदि मौजूद रहे।
इस दौरान आयोजक पप्पू सिंह व दिनेश सिंह सहित रामबाबू सिंह, राजकुमार उपाध्याय, मुरारी सिंह, अजय उपाध्याय, अरूण सिंह, रामजी उस्ताद सहित बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।