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कलियुग में राम कथा ही एक मात्र कामधेनु
Mirzapur
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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चुनार। शिवा उत्सव वाटिका में नौ दिवसीय रामकथा का भव्य शुभारंभ प्रख्यात संत कथा वाचक स्वामी अचलानंद जी ने किया। व्यासपीठ से राम कथा का रसास्वादन कराते हुए स्वामी जी ने कहा कि मानव जीवन बड़े भाग्य से मिलता है। जिसकी सार्थकता सत्संग व सत्कर्म में ही है। मनुष्य यदि अपना लोक व परलोक दोनों को सुधारना चाहते हैं, तो उन्हें सत्संग और सद्गुरू के शरण में रहना ही होगा।
राम चरित्र मानस की चौपाई बिनु सत्संग विवेक न होई राम कृपा बिन सुलभ न सोई की सुंदर व्याख्या किया। कहा कि प्रभू की कृपा सब पर होती है लेकिन जो उनकी शरण में जाता है और सत्संग करता है उसको सद्गति प्राप्त होती है। स्वामी जी ने कहा रामकथा कलि कामद गाई यानि कलयुग में राम कथा ही एक मात्र कामधेनू है। जिसके श्रवण से मानव का मन क्रम वचन सब शुद्ध हो जाता है।
बांदा से पधारे मानस मर्मज्ञ कथा वाचक यज्ञेश मिश्र ने कहा कि आज लक्ष्मी का महत्व बढ़ता जा रहा है। जीवन का पहिया बिना लक्ष्मी के आगे बढ़ना संभव नहीं है। जबकि लक्ष्मी तो चंचला हैं, वह कब किसके पास रूकी हैं। आज जो राजा है कल उसका भी समय परिवर्तित हो जाएगा। बचपन में वह विश्वामित्र के साथ उनकी रक्षा के लिए गए। यौवन काल में पिता के वचन की रक्षा के लिए पत्नी व अनुज लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान कर गए। पत्नी को लंकापति रावण उठा ले गया। वानर राज बाली का बध कर सुग्रीव के हक को दिलाया। इन सब बातों से साफ होता है कि सत्संग व प्रभू का स्मरण ही जीवन को सुखी बना सकता है।
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आत्मविकास परिषद द्वारा आयोजित रामकथा के संयोजक पं. नंदकिशोर तिवारी व रफी अहमद ने सभी विशिष्ट जनों का स्वागत किया। कथा में उपस्थित डा.एसपी द्विवेदी, तहसीलदार मनोज कुमार राय, आरके सिंह, रफीक आलम, श्यामधर चतुर्वेदी, देवी प्रसाद त्रिपाठी, चंद्रहास गुप्ता, कमलेश्वर कमल, राजू यादव सहित सैकड़ो कथा प्रेमी नर नारी देर रात तक रामकथा का रसास्वादन करते रहे।
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राम चरित्र मानस की चौपाई बिनु सत्संग विवेक न होई राम कृपा बिन सुलभ न सोई की सुंदर व्याख्या किया। कहा कि प्रभू की कृपा सब पर होती है लेकिन जो उनकी शरण में जाता है और सत्संग करता है उसको सद्गति प्राप्त होती है। स्वामी जी ने कहा रामकथा कलि कामद गाई यानि कलयुग में राम कथा ही एक मात्र कामधेनू है। जिसके श्रवण से मानव का मन क्रम वचन सब शुद्ध हो जाता है।
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बांदा से पधारे मानस मर्मज्ञ कथा वाचक यज्ञेश मिश्र ने कहा कि आज लक्ष्मी का महत्व बढ़ता जा रहा है। जीवन का पहिया बिना लक्ष्मी के आगे बढ़ना संभव नहीं है। जबकि लक्ष्मी तो चंचला हैं, वह कब किसके पास रूकी हैं। आज जो राजा है कल उसका भी समय परिवर्तित हो जाएगा। बचपन में वह विश्वामित्र के साथ उनकी रक्षा के लिए गए। यौवन काल में पिता के वचन की रक्षा के लिए पत्नी व अनुज लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान कर गए। पत्नी को लंकापति रावण उठा ले गया। वानर राज बाली का बध कर सुग्रीव के हक को दिलाया। इन सब बातों से साफ होता है कि सत्संग व प्रभू का स्मरण ही जीवन को सुखी बना सकता है।
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आत्मविकास परिषद द्वारा आयोजित रामकथा के संयोजक पं. नंदकिशोर तिवारी व रफी अहमद ने सभी विशिष्ट जनों का स्वागत किया। कथा में उपस्थित डा.एसपी द्विवेदी, तहसीलदार मनोज कुमार राय, आरके सिंह, रफीक आलम, श्यामधर चतुर्वेदी, देवी प्रसाद त्रिपाठी, चंद्रहास गुप्ता, कमलेश्वर कमल, राजू यादव सहित सैकड़ो कथा प्रेमी नर नारी देर रात तक रामकथा का रसास्वादन करते रहे।