यजमानों की खातिर पुलिस से भिड़ जाते हैं पंडे

Mirzapur Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
विंध्यधाम। विंध्याचल में लगभग हर नवरात्र में पंडों व पुलिस के बीच टकराहट होती रहती है। गत वर्ष भी नवरात्र में तत्कालीन एसपी सिटी डा. श्रीपति मिश्र से पंडा समाज के पदाधिकारियों की झड़प हो गई थी और पुलिस व पंडा समाज आमने-सामने आ गए थे। हालांकि तत्कालीन कप्तान के. सत्यनारायण व डीएम संयुक्ता समद्दार के कमान संभाल लेने से स्थिति बिगड़ने से बच गई थी।
हर नवरात्र में देश भर से कई लाख लोग मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने विंध्य धाम आते हैं। बाकी दिनों में दर्शन पूजन की व्यवस्था तीर्थ पुरोहितों की ही होती है पर नवरात्र में यह काम प्रशासन अपने हाथ में ले लेता है। दर्शन-पूजन कराने की पूरी व्यवस्था से अलग कर दिया जाना प्रशासन और पंडा समाज के बीच तकरार का कारण बन जाता है।

नवरात्र के नौ दिनों में भी छह दिन तक तो दोनों पक्ष के बीच होने वाले गुप्त समझौते के तहत दर्शन-पूजन का काम चलता रहता है। दोनों ही तरफ के लोग अपने-अपने यजमानों को वीआईपी लाइन से दर्शन-पूजन कराते रहते हैं। प्रशासन के लोग सरकारी मेहमानों के साथ-साथ अपने रिश्तेदारों व मित्रों और उनके परिवारों को दर्शन-पूजन कराते हैं। इसके लिए सरकारी वाहनों का भी धड़ल्ले से प्रयोग होता है। उधर, पंडा समाज के लोग भी अपने पुराने यजमानों को दर्शन-पूजन में कोई तकलीफ नहीं होने देना चाहते हैं। यही वजह है कि नवरात्र के अंतिम तीन दिनों में जब भीड़ का दबाव चरम पर होता है तो मंदिर में तैनात पुलिसकर्मी आपा खो देते हैं। संयम खोने वालों में ज्यादातर गैर जनपद से मेला ड्यूटी पर आने वाले पुलिसकर्मी ही रहते हैं।
उनकी चिंता मंदिर परिसर से भीड़ को जल्दी से जल्दी बाहर निकालने की रहती है। ऐसे में तीर्थ पुरोहित और उनके यजमान बीच बीच में बाधा डालने लगते है तो वर्दीधारी बौखला जाते हैं। उधर तीर्थ पुरोहितों को भी अपने यजमानों के सामने न सिर्फ सम्मान खोने का खतरा बल्कि रोजी-रोटी पर संकट का भय सतानेे लगता है। यही भय उन्हें पुलिस जैसे ताकतवर संस्था से भी भिड़ने से नहीं रोक पाता है। विंध्याचल में रविवार की देर रात जो हुआ वह इसी की परिणति रही। पंडा समाज के कुछ सदस्यों का कहना है कि पुलिस को यदि टाइट ही रहना है तो फिर वह मेला के पहले दिन से ही चुस्त रहे। वहीं पंडा समाज के अध्यक्ष राजन पाठक कहते हैं कि पुरोहितों के साथ दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। पुरोहित तो अपने यजमानों को दर्शन कराने के लिए ही मंदिर में आते हैं न कि व्यवस्था को बिगाड़ने। फिर पुलिस क्यों तांडव करती है यह बात समझ से परे है।

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