राजगढ़ में नए प्रमुख को लेकर जोड़तोड़ तेज

Mirzapur Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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राजगढ़। ब्लाक प्रमुख पद से श्रीमती कुदरी देवी को बेदखल करने के बाद जहां अधिकांश बीडीसी सदस्यों में हर्ष की लहर व्याप्त है वहीं निवर्तमान प्रमुख के खेमे में मायूसी छा हुई है। विरोधी पक्ष के लोगों ने मिठाइयां बांट कर खुशी का इजहार किया तो इसी के साथ ही आगामी प्रमुख को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। तमाम दावेदार क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी चोटी का पसीना एक किए हुए हैं।
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बुधवार को राजगढ़ ब्लाक प्रमुख कुदरी देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर दिया गया। प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू होने की बात कहकर जुलूस निकालने पर भले ही प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन गांवों में बीडीसी सदस्य मिठाइयां बांट कर खुशियां मना रहे हैं। तो कुदरी देवी के विरोध का बिगुल फूंकने वाले पूर्व प्रमुख दिनेश सिंह के सक्तेशगढ़ स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। हर कोई इस अविश्वास प्रस्ताव के बाद पूर्व प्रमुख का विश्वासपात्र बनना चाह रहा है।
पूर्व प्रमुख ने कुदरी देवी को कुर्सी से बेदखल करने के लिए एड़ी चोटी का पसीना एक कर दिया था। इसकी काट के लिए निवर्तमान प्रमुख कुदरी देवी ने सपा का हाथ थाम लिया था और सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं के साथ जाकर प्रदेश हाईकमान के समक्ष सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। सत्ता पक्ष के दबाव में अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त कराने के लिए काफी दबाव भी डाला गया और सदस्यों को भी येन केन प्रकारेण अपने पक्ष में करने की कोशिश की गई लेकिन अंतत: उन्हें निराशा ही हाथ लगी। वहीं अधिकारियों ने भी मतदान को टालने की पूरी कोशिश की। जिलाधिकारी ने नौ मई को पूर्वांह्न 11 बजे से मतदान कराने का निर्देश दिया था जबकि काफी जद्दोजहद व सदस्यों के दबाव के बाद मतदान अपराह्न 12.30 बजे से शुरू हो सका। अधिकारी द्वय एसडीएम मडि़हान एवं डीपीआरओ मिर्जापुर पूरी मतदान प्रक्रिया के दौरान मोबाइल पर मशगूल रहे। जनपद के नेताओं के साथ ही प्रदेश के भी कई प्रभावशाली नेताओं ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। कुदरी देवी के खिलाफ बीडीसी सदस्यों को एकजुट करने वाले पूर्व प्रमुख दिनेश सिंह को नेताओं के दबाव में हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने नजरबंद भी कर दिया था। बावजूद इसके वह अपने मंसूबे में सफल रहे। जिले में कुल 12 विकास खंड हैं। जिसमें अधिकांश सीटों पर बसपा समर्थित प्रमुख ही काबिज हैं। इनको कुर्सी से बेदखल करने के लिए राजगढ़ से सिलसिला शुरू हो गया है। कई और विकास खंडों में प्रमुखों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
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