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मां विंध्यवासिनी का दर्शन पाकर श्रद्घालु निहाल
Updated Sat, 25 Aug 2018 11:52 PM IST
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विंध्याचल। विंध्य धाम में आदि शक्ति मां विंध्यवासिनी का भव्य शृंगार किया गया। इसके बाद मां के भव्य स्वरूप के दर्शन के लिए शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। बरसात के बीच बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की। पूरे दिन दर्शन पूजन का दौर चलता रहा। भव्य आरती के समय बज रहे घंटा-घड़ियाल, शंख ध्वनि और माता के जयकारे से पूरा धाम देवीमय हो गया।
जगत जननी मां विंध्यवासिनी दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे नर-नारियों ने विधि-विधान पूर्वक दर्शन-पूजन करके मंगलकामना कामना की। नारियल-चुनरी सहित रोरी-रक्षा, लाचीदाना एवं प्रसाद के साथ श्रद्घालु मंदिर पहुंचे, जहां मां विंध्यवासिनी के दिव्य श्रृंगार का दर्शन कर भावविह़वल हो उठे। मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन करनेे के बाद भक्तजनों ने मंदिर परिसर में विराजमान गणेश भगवान, मां काली, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, राधा-कृष्ण, बटूक भैरव, मां शीतला, श्री पंचमुखी महादेव जी के मंदिरों पहुंचकर मत्था टेका। मंदिर के बाहर कतार में प्रसाद लेकर खड़े नर-नारी व बच्चे मां का जयकरा लगाते हुए मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। दर्शन-पूजन के बाद भक्तों ने झमाझम हो रही बारिश की परवाह किए बगैर विंध्याचल की गलियों में सजी तरह-तरह की दूकानों पर पहुंचकर अपने जरूरत की वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी की। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा की गूंज सहित माता के जयकारे से पूरा धाम परिसर गुंजायमान हो रहा था। बारिश होने से कई गलियों में फैले कीचड़ व गंदगी के कारण श्रद्घालुओं को आवागमन में असुविधा का भी सामना करना पड़ा, वहीं गंगा घाट पर फैली गंदगी के चलते दूरदराज से आए भक्तों को स्नान करने में भी परेशानी हुई।
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जगत जननी मां विंध्यवासिनी दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे नर-नारियों ने विधि-विधान पूर्वक दर्शन-पूजन करके मंगलकामना कामना की। नारियल-चुनरी सहित रोरी-रक्षा, लाचीदाना एवं प्रसाद के साथ श्रद्घालु मंदिर पहुंचे, जहां मां विंध्यवासिनी के दिव्य श्रृंगार का दर्शन कर भावविह़वल हो उठे। मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य स्वरूप का दर्शन करनेे के बाद भक्तजनों ने मंदिर परिसर में विराजमान गणेश भगवान, मां काली, मां दुर्गा, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, राधा-कृष्ण, बटूक भैरव, मां शीतला, श्री पंचमुखी महादेव जी के मंदिरों पहुंचकर मत्था टेका। मंदिर के बाहर कतार में प्रसाद लेकर खड़े नर-नारी व बच्चे मां का जयकरा लगाते हुए मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। दर्शन-पूजन के बाद भक्तों ने झमाझम हो रही बारिश की परवाह किए बगैर विंध्याचल की गलियों में सजी तरह-तरह की दूकानों पर पहुंचकर अपने जरूरत की वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी की। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा की गूंज सहित माता के जयकारे से पूरा धाम परिसर गुंजायमान हो रहा था। बारिश होने से कई गलियों में फैले कीचड़ व गंदगी के कारण श्रद्घालुओं को आवागमन में असुविधा का भी सामना करना पड़ा, वहीं गंगा घाट पर फैली गंदगी के चलते दूरदराज से आए भक्तों को स्नान करने में भी परेशानी हुई।
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