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चावल उद्ययोग से जुड़ी समस्याओं पर हुई चर्चा
Updated Sun, 30 Sep 2018 12:08 AM IST
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मिर्जापुर। राइस मिलर्स एसोसिएशन की शनिवार को नगर के गणेशगंज स्थित एक होटल में हुई बैठक में राइस मिलरों ने सरकारी धान नहीं कूटने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया। चेतावनी दी कि अगर जोर जबरदस्ती की गई तो वे अपना मंडी लाइसेंस सरेंडर कर देंगे तथा मिलों की चाभी डीएम को सौंप देंगे।
राइस मिल मालिकों ने कहा कि सिर्फ सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का पूरा धान पाना संभव नहीं है। विगत वर्षों में सहकारी क्रय केंद्रों के साथ-साथ आढ़तियों की ओर से धान खरीद होने के कारण किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य प्राप्त हो रहा था। सरकार मिलर्स को धान कुटाई के मद में 25 वर्षों से 10 रुपये प्रति कुंतल देती है जो काफी कम है जबकि वेतन, लेबर चार्ज, बिजली दर, मशीनरी मूल्य, जमीनों सर्किल रेट, गोदाम निर्माण लागत आदि में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। आज अच्छी गुणवत्ता का चावल बनाने के लिए आधुनिक मशीनों से धान की कुटाई हो रही है जिससे करीब 150 रुपये प्रति कुंतल की दर से कुटाई का खर्च आ रहा है, जिससे चावल उद्योग को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। कहा गया कि सरकार धान खरीद कर चावल मिलों को कुटाई कार्य के लिए देती है। सौ किलो धान के बदले 67 किलो चावल मिलर से लेती है लेकिन 67 किलो चावल की रिकवरी नहीं होती है। बताया गया कि भारतीय खाद्य निगम के अनुरूप रिकवरी 53 प्रतिशत से 54 प्रतिशत तक ही बैठती है। अवशेष चावल मिलर्स को अपने पास से देना पड़ता है, जिससे आर्थिक क्षति मिलर्स को वहन करना पड़ता है। इस दौरान एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उमेश चंद्र मिश्र, सोनभद्र से प्रकाश चंद्र, रवि तिवारी व भदोही जनपद से राम मुरारी, अनिल मिश्र, मंशाराम तथा मिर्जापुर से विजय सिंह, शैलेष सिंह, मोहन, गोवर्धन दास, हरि नारायन सिंह, प्रेम सिंह, विनय सिंह, प्रदीप जायसवाल, अभय सिंह आदि रहे।
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राइस मिल मालिकों ने कहा कि सिर्फ सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का पूरा धान पाना संभव नहीं है। विगत वर्षों में सहकारी क्रय केंद्रों के साथ-साथ आढ़तियों की ओर से धान खरीद होने के कारण किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य प्राप्त हो रहा था। सरकार मिलर्स को धान कुटाई के मद में 25 वर्षों से 10 रुपये प्रति कुंतल देती है जो काफी कम है जबकि वेतन, लेबर चार्ज, बिजली दर, मशीनरी मूल्य, जमीनों सर्किल रेट, गोदाम निर्माण लागत आदि में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। आज अच्छी गुणवत्ता का चावल बनाने के लिए आधुनिक मशीनों से धान की कुटाई हो रही है जिससे करीब 150 रुपये प्रति कुंतल की दर से कुटाई का खर्च आ रहा है, जिससे चावल उद्योग को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। कहा गया कि सरकार धान खरीद कर चावल मिलों को कुटाई कार्य के लिए देती है। सौ किलो धान के बदले 67 किलो चावल मिलर से लेती है लेकिन 67 किलो चावल की रिकवरी नहीं होती है। बताया गया कि भारतीय खाद्य निगम के अनुरूप रिकवरी 53 प्रतिशत से 54 प्रतिशत तक ही बैठती है। अवशेष चावल मिलर्स को अपने पास से देना पड़ता है, जिससे आर्थिक क्षति मिलर्स को वहन करना पड़ता है। इस दौरान एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उमेश चंद्र मिश्र, सोनभद्र से प्रकाश चंद्र, रवि तिवारी व भदोही जनपद से राम मुरारी, अनिल मिश्र, मंशाराम तथा मिर्जापुर से विजय सिंह, शैलेष सिंह, मोहन, गोवर्धन दास, हरि नारायन सिंह, प्रेम सिंह, विनय सिंह, प्रदीप जायसवाल, अभय सिंह आदि रहे।
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