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खेतो में जैविक खाद का प्रयोग करें किसान
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:13 PM IST
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मिर्जापुर। मिट्टी में कार्बन की मात्रा में लगातार कम होने से उर्वर क्षमता कम हो रही है। इसको देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने जैविक खेती करने और वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापित करने पर जोर दिया है।
उप कृषि निदेशक अशोक उपाध्याय ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना 1745 ग्रामों में होगी। इस पर आठ हजार रुपये प्रति इकाई की लागत आएगी। इसके लिए सरकार 75 प्रतिशत अनुदान देगी जबकि 25 प्रतिशत अर्थात दो हजार रुपये किसान को खर्च करना होगा। वर्मी कंपोस्ट यूनिट के इच्छुक किसान 20 जनवरी तक विभागीय वेबसाइट पर पंजीकरण कराएं। उन्होंने बताया कि बढ़ती जनसंख्या, जोत छोटा होने और मिट्टी की उर्वर क्षमता कम होने के कारण उपज प्रभावित हो रही है। असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा का लगातार कम हो रही है। ऐसे में किसानों को जैविक खेती करनी होगी। बताया कि 1745 राजस्व ग्रामों में एक वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना की जानी है।
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उप कृषि निदेशक अशोक उपाध्याय ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना 1745 ग्रामों में होगी। इस पर आठ हजार रुपये प्रति इकाई की लागत आएगी। इसके लिए सरकार 75 प्रतिशत अनुदान देगी जबकि 25 प्रतिशत अर्थात दो हजार रुपये किसान को खर्च करना होगा। वर्मी कंपोस्ट यूनिट के इच्छुक किसान 20 जनवरी तक विभागीय वेबसाइट पर पंजीकरण कराएं। उन्होंने बताया कि बढ़ती जनसंख्या, जोत छोटा होने और मिट्टी की उर्वर क्षमता कम होने के कारण उपज प्रभावित हो रही है। असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा का लगातार कम हो रही है। ऐसे में किसानों को जैविक खेती करनी होगी। बताया कि 1745 राजस्व ग्रामों में एक वर्मी कम्पोस्ट इकाई की स्थापना की जानी है।
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