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कन्या भ्रूण हत्या राष्ट्रीय कलंक: स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:19 AM IST
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मिर्जापुर। नवरात्र में लोग कन्या पूजन करते हैं। शक्ति की उपासना करते हैं। यह दुखद है कि इसके बावजूद समाज में कन्या भ्रूण ही हत्या की जा रही है। यह बात अष्टभुजा पहाड़ी पर श्रीकृष्ण योगमाया पीठ में प्रवचन के दौरान परमहंस स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कही। उन्होंने धार्मिक मामलों के हल के लिएधर्म न्यायालय के स्थापना की बात कही।
उन्होंने कहा कि देश आजाद होने के बाद से वर्ष 2006 तक के तीन करोड़ 60 लाख से ज्यादा बालिकाओं को गर्भ में ही मार दिया गया। दुर्भाग्य यह कि ऐसे मामलों में किसी को सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि अपराध का दंड न मिले। भगवान ऐसे लोगों को दंड देते हैं। कन्या भ्रूण हत्या करने व सहयोग देने वाले जीवन में काफी कष्ट पाते हैं। उन्होंने कहा कि पालीथिन एवं केमिकल से रंगों के रावण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाने चाहिए। उनकी जगह लकड़ी और पुआल के बने पुतले जलाएं। शंकराचार्य पीठों के विवाद पर कहा कि ऐसे मामलों तके निपटारे के लिए धर्म न्यायालय बनाया जाना चाहिए, जहां धर्माचार्य ही जज हों। प्रवचन के बटुकों ने दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ एवं हवन किया।
उन्होंने कहा कि देश आजाद होने के बाद से वर्ष 2006 तक के तीन करोड़ 60 लाख से ज्यादा बालिकाओं को गर्भ में ही मार दिया गया। दुर्भाग्य यह कि ऐसे मामलों में किसी को सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि अपराध का दंड न मिले। भगवान ऐसे लोगों को दंड देते हैं। कन्या भ्रूण हत्या करने व सहयोग देने वाले जीवन में काफी कष्ट पाते हैं। उन्होंने कहा कि पालीथिन एवं केमिकल से रंगों के रावण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाने चाहिए। उनकी जगह लकड़ी और पुआल के बने पुतले जलाएं। शंकराचार्य पीठों के विवाद पर कहा कि ऐसे मामलों तके निपटारे के लिए धर्म न्यायालय बनाया जाना चाहिए, जहां धर्माचार्य ही जज हों। प्रवचन के बटुकों ने दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ एवं हवन किया।
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