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संसार में भरत जैसा भाई अब मिलना कठिन

Wed, 27 Feb 2019 01:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 27 Feb 2019 01:23 AM IST
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संसार में भरत जैसा भाई अब मिलना कठिन
हलिया। स्थानीय विकास खंड के कोटार नाथ स्थित शिव दरबार में आयोजित शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन मंगलवार को पं. दिनेश चंद्र द्विवेदी एवं वृंदावन से आई कुमारी विशाखा शास्त्री ने हनुमान तथा भरत चरित्र पर प्रकाश डाला। पं. दिनेश चंद्र द्विवेदी ने हनुमान चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शांत रहने वाले हनुमान जी देवों में देव हैं। माता जानकी को खोजते हुए लंका में प्रवेश करने के बाद उन्होंने ब्रह्म मुहूर्त में एक महल में राम नाम की जाप सुनकर ठिठक गए। महल में प्रवेश विभिषण से मुलाकात किया। स्वामी जी ने कहा कि जिस घर में सभी लोग मांसाहारी होते हैं उस घर का नाश हो 0जाता है। रावण के राज्य में सीता राम जपने वालों की हत्या कर दी जाती थी। ब्रह्म मुहूर्त में भगवान का जाप करने से वैकुंठ लाभ होता है। लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। ब्राह्मण रूप में विभीषण हनुमान जी को देखकर आश्चर्यचकित हो गए। अपना परिचय देते हुए हनुमान जी ने अपने को राम भक्त बताया। तब विभीषण ने भगवान के दर्शन करने की इच्छा प्रकट की और कहा कि हमारे में तीन कमियां हैं तन से तामस हूं प्रीत नहीं है साधन विहीन हूं क्या भगवान मुझे दर्शन देंगे। जिस पर महावीर ने कहा आप तो महर्षि पुलस्त्य के कुल से हैं तथा ब्राह्मण हैं। मैं वानर जाति का हूं सभी विधियों से हीन हूं फिर भी भगवान की कृपा मुझ पर हुई है। वृंदावन से पधारी कुमारी विशाखा शास्त्री ने कहा कि भरत जी भगवान राम की चरण पादुका सिंहासन पर रखकर नंदी गांव में कुटिया बनाकर भगवान के आने की राह देखते रहे। भरत जी को कभी राज का मद नहीं हुआ। भरत का अनुकरण समस्त भारत वासियों को करना चाहिए। कहा भरत जैसा भाई मिलना आज के युग में दुर्लभ है। इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक यज्ञाचार्य पं. शिवशंकर शास्त्री, महेश्वरी प्रसाद ओझा, राम गरीब तिवारी, भास्कर दत्त शुक्ल, दिलीप कुमार, कमला शंकर तिवारी, कमलेश, बबलु पांडेय, जयराम गिरी सहित भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
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