फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mirzapur News ›   भक्त भगवान को जिस रुप में देखना चाहें, मिलते हैं दर्शन

भक्त भगवान को जिस रुप में देखना चाहें, मिलते हैं दर्शन

Mon, 25 Feb 2019 12:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 25 Feb 2019 12:42 AM IST
विज्ञापन
भक्त भगवान को जिस रुप में देखना चाहें, मिलते हैं दर्शन
हलिया। कोटारनाथ स्थित शिव मंदिर प्रांगण में शतचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन वृंदावन से आईं विशाखा और जौनपुर के दिनेश चंद्र द्विवेदी ने बाबा भोलेनाथ के दरबार में भक्तों को श्रीराम कथा का पान कराया। विशाखा ने श्रीराम-केवट संवाद की कथा सुनाई। उन्होंने कहा भगवान श्रीराम मनुष्य रूप में अवतरित होकर वन गमन के समय सरयू नदी के तट पर पहुंचे। उन्होंने केवट से सीता तथा लक्ष्मण के साथ नदी को पार करने के लिए नाव लाने को कहा। केवट ने नाव देने से मना कर दिया और कहा कि मैं आपको नाव नहीं दे सकता क्योंकि मैं आपके मर्म को जानता हूं। आपके चरणों की रज से पत्थर भी स्त्री बन जाती है। मेंरी नाव मेरे परिवार के जीवन का आधार है। मैं जब तक आपके चरण नहीं धोउंगा, तब तक नाव पर नहीं बैठा सकता। यह मार्मिक वचन सुनकर भगवान श्रीराम ने चरण धोने की अनुमति दे दी। दिनेश चंद्र द्विवेदी ने संगीतमय प्रवचन के दौरान कहा कि भक्त भक्त जिस रूप में चाहते हैं उसी रूप में भगवान उनसे मिलते हैं। दशरथ भगवान को राम को पुत्र के रूप में देखना चाहते थे, इसलिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम उन्हें पुत्र के रूप में प्राप्त हुए। इस दौरान पं. शिव शंकर शास्त्री, पं. माहेश्वरी प्रसाद ओझा, शिव राम गिरी, गुलाब सिंह, विद्या सागर , दुष्यंत सिंह, शीतला मिश्र, सुरेश मिश्र, शांति देवी आदि रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed