हलिया। कोटारनाथ स्थित शिव मंदिर प्रांगण में शतचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन वृंदावन से आईं विशाखा और जौनपुर के दिनेश चंद्र द्विवेदी ने बाबा भोलेनाथ के दरबार में भक्तों को श्रीराम कथा का पान कराया। विशाखा ने श्रीराम-केवट संवाद की कथा सुनाई। उन्होंने कहा भगवान श्रीराम मनुष्य रूप में अवतरित होकर वन गमन के समय सरयू नदी के तट पर पहुंचे। उन्होंने केवट से सीता तथा लक्ष्मण के साथ नदी को पार करने के लिए नाव लाने को कहा। केवट ने नाव देने से मना कर दिया और कहा कि मैं आपको नाव नहीं दे सकता क्योंकि मैं आपके मर्म को जानता हूं। आपके चरणों की रज से पत्थर भी स्त्री बन जाती है। मेंरी नाव मेरे परिवार के जीवन का आधार है। मैं जब तक आपके चरण नहीं धोउंगा, तब तक नाव पर नहीं बैठा सकता। यह मार्मिक वचन सुनकर भगवान श्रीराम ने चरण धोने की अनुमति दे दी। दिनेश चंद्र द्विवेदी ने संगीतमय प्रवचन के दौरान कहा कि भक्त भक्त जिस रूप में चाहते हैं उसी रूप में भगवान उनसे मिलते हैं। दशरथ भगवान को राम को पुत्र के रूप में देखना चाहते थे, इसलिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम उन्हें पुत्र के रूप में प्राप्त हुए। इस दौरान पं. शिव शंकर शास्त्री, पं. माहेश्वरी प्रसाद ओझा, शिव राम गिरी, गुलाब सिंह, विद्या सागर , दुष्यंत सिंह, शीतला मिश्र, सुरेश मिश्र, शांति देवी आदि रहीं।