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एनडीआर प्रजाति के धान की खेती अनुदान पर कराई जाएगी
Updated Sat, 16 Jun 2018 11:04 PM IST
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हलिया। राजकीय कृषि बीज भंडार की ओर से खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत हलिया ब्लाक में प्रदर्शन के तौर पर 200 हेक्टेअर में एनडीआर प्रजाति के धान की खेती अनुदान पर कराई जाएगी। कलस्टर विधि से धान की प्रदर्शन खेती के लिए चयनित किसानों को बीज, दवा तथा जिंक सल्फेट की खरीद पर आने वाली धनराशि उनके बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
इस योजना के तहत किसानों को दो हेक्टेअर जमीन पर ही इस अनुदान का लाभ मिल सकता है। एनडीआर प्रजाति के धान के बीज को असिंचित क्षेत्र में उत्पादन देने के लिए जाना जाता है। कृषि बीज भंडार हलिया के बीटीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अलग अलग दो गांवों में सौ-सौ हेक्टेयर जमीन पर धान की प्रदर्शन खेती कराने का निर्णय लिया गया है । संभव न हो पाने पर एक गांव से 25 हेक्टेअर यानी ऐसे आठ गांवों से 200 हेक्टेअर का लक्ष्य पूरा किया जाएगा । इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रत्येक किसान को आवेदन के साथ संबंधित जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक तथा आधार कार्ड की फोटो कापी उपलब्ध करानी होगी । धान की प्रदर्शन खेती के लिए चुने गए किसान को पहले पूरी लागत लगानी होगी। बाद में विभाग द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार लागत की शत प्रतिशत अनुदानित धनराशि पंद्रह से बीस दिन बाद किसान के खाते में भेज दी जाएगी। बीटीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के लिए अलग-अलग गांवों में अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।
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इस योजना के तहत किसानों को दो हेक्टेअर जमीन पर ही इस अनुदान का लाभ मिल सकता है। एनडीआर प्रजाति के धान के बीज को असिंचित क्षेत्र में उत्पादन देने के लिए जाना जाता है। कृषि बीज भंडार हलिया के बीटीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अलग अलग दो गांवों में सौ-सौ हेक्टेयर जमीन पर धान की प्रदर्शन खेती कराने का निर्णय लिया गया है । संभव न हो पाने पर एक गांव से 25 हेक्टेअर यानी ऐसे आठ गांवों से 200 हेक्टेअर का लक्ष्य पूरा किया जाएगा । इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रत्येक किसान को आवेदन के साथ संबंधित जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक तथा आधार कार्ड की फोटो कापी उपलब्ध करानी होगी । धान की प्रदर्शन खेती के लिए चुने गए किसान को पहले पूरी लागत लगानी होगी। बाद में विभाग द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार लागत की शत प्रतिशत अनुदानित धनराशि पंद्रह से बीस दिन बाद किसान के खाते में भेज दी जाएगी। बीटीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के लिए अलग-अलग गांवों में अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।
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