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मिर्जापुर कइल गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कइल बलमू ...
Updated Sat, 12 Aug 2017 01:04 AM IST
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मिर्जापुर। लायंस स्कूल सभागार में कजली महोत्सव का आयोजन गुरुवार की शाम को किया गया। जिसमें कजली गायकों ने श्रोताओं को भोर की लालिमा तक बांधे रखा। कार्यक्रम में उषा गुप्ता ने मिर्जापुर कइल गुलजार हो, कचौड़ी गली सून कइल बलमू की प्रस्तुति की। अमित दूबे ने हो मईया कब देबू दर्शनवा, अब त चढ़ल सवनवा ना को प्रस्तुति कर वाहवाही लूटी।
महोत्सव में मुख्य अतिथि मझवां विधायक सुचिस्मिता मौर्य, डीएम बिमल कुमार दूबे, एसपी आशीष तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साथ ही कजली के महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कजली से हम राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्री पहचान बना सकते है। किरन की शिष्याओं द्वारा सरस्वती वंदना और संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ। कार्यक्रम में अमरनाथ शुक्ल ने घड़ी घड़ी गरजे बदरिया चमके बिजुरिया रे हरि की प्रस्तुति कर माटी की खुशबु का एहसास कराया। लायंस स्कूल की बालिकाओं ने घेर घेर आई सावन की बदरिया ना का गायन किया। रानी सिंह ने सैया भइले परदेशिया अरे सावलिया की प्रस्तुति कर वाहवाही लूटी। अर्पिता तिवारी ने कइसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरे आई ननदी। माया कसेरा ने विरन भईया अइले सवनवा में नाहीं जइबे ननदी की मनोहारी प्रस्तुति की। लल्लन मालवीय के पौत्र रामकृष्ण मालवीय ने चमके बदरिया रे झालरियां को मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया। मोहनलाल कायंस्कार ने पिया आये ना सावनवां में निकस करके , बाबू लाल शर्मा और सरोज शर्मा एंड पार्टी ने लुप्ता हो रही चौलर की विधा का मनोहारी मंचन किया। जया पाठक ने जा जा रे बदरिया कारि कारि संदेशा मोरा श्याम से कहो की आवाज लगाकर श्रोताओं को भक्तिसागर में डुबकी लगाया। कजली अखाड़े के गायब पट्टर पांडेय ने झूमकर कजली प्रस्तुुत किया। इसके अलावा कुसुम पांडेय, मनोज शर्मा, शिवलाल गुप्ता, मो. मुस्तकीम, अतुल देव दूूबे, चित्रांशी श्रीवास्तव, ब्रहमदेव पांडेय, कल्पना गुप्ता आदि कलाकारों ने दर्शकों को बांधे रखा। गायकों के साथ तबला पर झब्बू लाल, ढोलक पर अंग्रेज और रोहित कुमार, हारमोनियम पर मो. मुस्तकीम, ओम प्रकाश और शहनाई पर तोलन ने संगत किया। कार्यक्रम का संचालन डा. गणेश प्रसाद अवस्थी ने किया। इस दौरान एसडीएम सदर अविनाश त्रिपाठी, संगीता अग्रवाल, नितिन अवस्थी, राजपति ओझा आदि मौजूद रहे।
महोत्सव में मुख्य अतिथि मझवां विधायक सुचिस्मिता मौर्य, डीएम बिमल कुमार दूबे, एसपी आशीष तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साथ ही कजली के महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कजली से हम राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्री पहचान बना सकते है। किरन की शिष्याओं द्वारा सरस्वती वंदना और संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ। कार्यक्रम में अमरनाथ शुक्ल ने घड़ी घड़ी गरजे बदरिया चमके बिजुरिया रे हरि की प्रस्तुति कर माटी की खुशबु का एहसास कराया। लायंस स्कूल की बालिकाओं ने घेर घेर आई सावन की बदरिया ना का गायन किया। रानी सिंह ने सैया भइले परदेशिया अरे सावलिया की प्रस्तुति कर वाहवाही लूटी। अर्पिता तिवारी ने कइसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरे आई ननदी। माया कसेरा ने विरन भईया अइले सवनवा में नाहीं जइबे ननदी की मनोहारी प्रस्तुति की। लल्लन मालवीय के पौत्र रामकृष्ण मालवीय ने चमके बदरिया रे झालरियां को मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया। मोहनलाल कायंस्कार ने पिया आये ना सावनवां में निकस करके , बाबू लाल शर्मा और सरोज शर्मा एंड पार्टी ने लुप्ता हो रही चौलर की विधा का मनोहारी मंचन किया। जया पाठक ने जा जा रे बदरिया कारि कारि संदेशा मोरा श्याम से कहो की आवाज लगाकर श्रोताओं को भक्तिसागर में डुबकी लगाया। कजली अखाड़े के गायब पट्टर पांडेय ने झूमकर कजली प्रस्तुुत किया। इसके अलावा कुसुम पांडेय, मनोज शर्मा, शिवलाल गुप्ता, मो. मुस्तकीम, अतुल देव दूूबे, चित्रांशी श्रीवास्तव, ब्रहमदेव पांडेय, कल्पना गुप्ता आदि कलाकारों ने दर्शकों को बांधे रखा। गायकों के साथ तबला पर झब्बू लाल, ढोलक पर अंग्रेज और रोहित कुमार, हारमोनियम पर मो. मुस्तकीम, ओम प्रकाश और शहनाई पर तोलन ने संगत किया। कार्यक्रम का संचालन डा. गणेश प्रसाद अवस्थी ने किया। इस दौरान एसडीएम सदर अविनाश त्रिपाठी, संगीता अग्रवाल, नितिन अवस्थी, राजपति ओझा आदि मौजूद रहे।
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