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सोलर पंप दिलाएगा पेयजल समस्या से निजात
Updated Sat, 10 Feb 2018 12:17 AM IST
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इस तरह लगेगा सोलर पंप और टंकी
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मिर्जापुर। गर्मी के दिनों में जिले के पठारी और पहाड़ी ब्लॉकों में पानी की समस्या को देखते हुए जिले में सोलर आधारित सबमर्सिबल पंप से लगानेे की योजना बनाई गई है। इससे बिजली नहीं रहने पर भी पेयजल की समस्या दूर करने में आसानी होगी। सबमर्सिबल पंप पांच सौ फीट गहराई से भी पानी निकालने में सक्षम होगा। पेयजल की समस्या वाले ब्लॉकों में इसे लगाने की योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भी इस योजना को हरी झंडी दिखा दी है।
जिले के राजगढ़, पटेहरा, लालगंज और हलिया ब्लॉकों में गर्मी के दिनों को तो छोड़िये सर्दी के दिनों में भी पेयजल की समस्या बनी रहती है। जिला हैंडपंपों से पूरी तरह से आच्छादित है। जितनी संख्या में हैंडपंपों को लगाने की जरूरत थी उतने लगाये भी जा चुके हैं लेकिन हैंडपंपों से पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे जलस्तर का नीचे चले जाना प्रमुख कारण है। हैंडपंपो के पानी छोड़ने के पीछे वजह यह है कि इन्हें रीबोर नहीं किया गया है। हैंडपंपों की बोरिंग अधिकतम सौ से 120 फीट तक होती है। गर्मी के दिनों में पानी इससे भी नीचे चला जाता है। हलिया ब्लॉक के लहुरियादह में तो पानी की समस्या को देखते हुए वहां टैंकर से पानी भिजवाने का प्रयास प्रशासन ने किया था लेकिन यह व्यवस्था भी बहुत कारगर साबित नहीं हुई। अब जिले की सांसद और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने पहाड़ी और पठारी इलाकों में पेयजल मुहैया कराने की योजना बनाई है। ऐसे गांव जहां के मजरों में तीन सौ से अधिक की आबादी है वहां सोलर आधारित सबमर्सिबल पंप बना कर भूजल को ऊपर लाने की योजना है। पानी के ऊपर आने पर हर मजरे में पांच हजार लीटर की टंकी बना कर उसे स्टोर किया जाएगा। इन इलाकों में बिजली भी नहीं रहती है इसलिए सोलर आधारित पंप होने के कारण बिजली कटौती का भी असर नहीं होगा। इसके लगने से बिजली का खर्च भी नहीं लगेगा। बीते सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस योजना को लागू करने का आग्रह तो मुख्यमंत्री ने योजना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री ने जिला प्रशासन को योजना के कार्यान्वयन के लिए एक अधिकारी को नियुक्त करते हुए ब्लॉकवार मजरों की संख्या और उनकी जनसंख्या को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पहाड़ी व पठारी इलाकों में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए पहले चक्र में तीन सौ से अधिक की जनसंख्या वाले मजरों का चयन कर वहां सोलर सबमर्सिबल पंप लगाए जाएंगे। प्रति पंप साढे़ तीन से चार लाख का खर्च आने की संभावना है। इसके लिए सांसद निधि और भारत सरकार की पेयजल योजनाओं से धनराशि दिलाई जाएगी।
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जिले के राजगढ़, पटेहरा, लालगंज और हलिया ब्लॉकों में गर्मी के दिनों को तो छोड़िये सर्दी के दिनों में भी पेयजल की समस्या बनी रहती है। जिला हैंडपंपों से पूरी तरह से आच्छादित है। जितनी संख्या में हैंडपंपों को लगाने की जरूरत थी उतने लगाये भी जा चुके हैं लेकिन हैंडपंपों से पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे जलस्तर का नीचे चले जाना प्रमुख कारण है। हैंडपंपो के पानी छोड़ने के पीछे वजह यह है कि इन्हें रीबोर नहीं किया गया है। हैंडपंपों की बोरिंग अधिकतम सौ से 120 फीट तक होती है। गर्मी के दिनों में पानी इससे भी नीचे चला जाता है। हलिया ब्लॉक के लहुरियादह में तो पानी की समस्या को देखते हुए वहां टैंकर से पानी भिजवाने का प्रयास प्रशासन ने किया था लेकिन यह व्यवस्था भी बहुत कारगर साबित नहीं हुई। अब जिले की सांसद और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने पहाड़ी और पठारी इलाकों में पेयजल मुहैया कराने की योजना बनाई है। ऐसे गांव जहां के मजरों में तीन सौ से अधिक की आबादी है वहां सोलर आधारित सबमर्सिबल पंप बना कर भूजल को ऊपर लाने की योजना है। पानी के ऊपर आने पर हर मजरे में पांच हजार लीटर की टंकी बना कर उसे स्टोर किया जाएगा। इन इलाकों में बिजली भी नहीं रहती है इसलिए सोलर आधारित पंप होने के कारण बिजली कटौती का भी असर नहीं होगा। इसके लगने से बिजली का खर्च भी नहीं लगेगा। बीते सोमवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस योजना को लागू करने का आग्रह तो मुख्यमंत्री ने योजना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री ने जिला प्रशासन को योजना के कार्यान्वयन के लिए एक अधिकारी को नियुक्त करते हुए ब्लॉकवार मजरों की संख्या और उनकी जनसंख्या को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पहाड़ी व पठारी इलाकों में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए पहले चक्र में तीन सौ से अधिक की जनसंख्या वाले मजरों का चयन कर वहां सोलर सबमर्सिबल पंप लगाए जाएंगे। प्रति पंप साढे़ तीन से चार लाख का खर्च आने की संभावना है। इसके लिए सांसद निधि और भारत सरकार की पेयजल योजनाओं से धनराशि दिलाई जाएगी।
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