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Mirzapur News: लालगंज में 40 प्रतिशत लोगों के पास शौचालय नहीं, जनगणना में खुलासा
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भवनों की गणना के तहत ली जा रही है घर की पूरी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। तहसील क्षेत्र में चल रही जनगणना के दौरान जुटाए जा रहे आंकड़ों में लगभग 40 प्रतिशत परिवार ऐसे मिले हैं जहां शौचालय नहीं हैं या फिर बने हुए शौचालय उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। यह स्थिति हैरान करने वाली है। वर्षों तक चले स्वच्छता अभियान और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हो सकी है।
लालगंज और हलिया ब्लॉक के अनेक गांवों में घर-घर पहुंच रहे प्रगणकों को सर्वेक्षण के दौरान यह स्थिति देखने को मिल रही है। खजुरी, कठवार, खैरा, उस्का, राजापुर, तुलसी, विरतिया, तुर्कहा, कोठी, तिलांव, कोटाघाट, नैड़ी और बरबसा समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में परिवारों के पास शौचालय नहीं है। वहीं जहां शौचालय बने भी हैं, उनमें से कई केवल ढांचे के रूप में खड़े हैं। गांव की रीता देवी ने बताया कि कई घरों में शौचालय बने हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं होता। ऐसे में महिलाओं को आज भी बाहर जाने की विवशता झेलनी पड़ती है। सुषमा का कहना है कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद खुले में शौच की आदत पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। जनगणना के दौरान महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा खुलकर बताई। गांवों की चौपालों, चाय-पान की दुकानों और जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा आम है कि स्वच्छता अभियान के बावजूद अपेक्षित बदलाव अभी तक नहीं दिखाई दे रहा है। जनगणना के दौरान सामने आ रही यह तस्वीर संकेत दे रही है कि केवल शौचालय निर्माण ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके नियमित उपयोग और व्यवहार परिवर्तन की दिशा में अभी और प्रयास किए जाने की जरूरत है।
कोट
शत प्रतिशत शौचालय बने हैं। लेकिन जो परिवार में से अलग हो रहे हैं। वही तकनीकी रूप से शौचालय और आवास दोनों की जरूरत है और चिह्नित भी किया जा रहा है।
अजय शंकर,एडीओ पंचायत
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संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। तहसील क्षेत्र में चल रही जनगणना के दौरान जुटाए जा रहे आंकड़ों में लगभग 40 प्रतिशत परिवार ऐसे मिले हैं जहां शौचालय नहीं हैं या फिर बने हुए शौचालय उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। यह स्थिति हैरान करने वाली है। वर्षों तक चले स्वच्छता अभियान और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हो सकी है।
लालगंज और हलिया ब्लॉक के अनेक गांवों में घर-घर पहुंच रहे प्रगणकों को सर्वेक्षण के दौरान यह स्थिति देखने को मिल रही है। खजुरी, कठवार, खैरा, उस्का, राजापुर, तुलसी, विरतिया, तुर्कहा, कोठी, तिलांव, कोटाघाट, नैड़ी और बरबसा समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में परिवारों के पास शौचालय नहीं है। वहीं जहां शौचालय बने भी हैं, उनमें से कई केवल ढांचे के रूप में खड़े हैं। गांव की रीता देवी ने बताया कि कई घरों में शौचालय बने हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं होता। ऐसे में महिलाओं को आज भी बाहर जाने की विवशता झेलनी पड़ती है। सुषमा का कहना है कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद खुले में शौच की आदत पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। जनगणना के दौरान महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा खुलकर बताई। गांवों की चौपालों, चाय-पान की दुकानों और जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा आम है कि स्वच्छता अभियान के बावजूद अपेक्षित बदलाव अभी तक नहीं दिखाई दे रहा है। जनगणना के दौरान सामने आ रही यह तस्वीर संकेत दे रही है कि केवल शौचालय निर्माण ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके नियमित उपयोग और व्यवहार परिवर्तन की दिशा में अभी और प्रयास किए जाने की जरूरत है।
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शत प्रतिशत शौचालय बने हैं। लेकिन जो परिवार में से अलग हो रहे हैं। वही तकनीकी रूप से शौचालय और आवास दोनों की जरूरत है और चिह्नित भी किया जा रहा है।
अजय शंकर,एडीओ पंचायत