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सरकारी भवन तो बने लेकिन उपयोगिता साबित नहीं
Updated Thu, 15 Feb 2018 12:00 AM IST
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मिर्जापुर। जिले में करोड़ों की लागत से बने कई सरकारी भवनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है जिससे वे निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। इनमें कई अस्पतालों के भवन भी शामिल हैं। इसी तरह चुनार में पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए बनाये गए अतिथि गृह का उपयोग नहीं होने के कारण यह शोपीस बना हुआ है। जिला मुख्यालय पर बनकर तैयार महिला चिकित्सालय के भवन को विभाग के सुपुर्द नहीं किया गया है।
जिले में विकास के नाम पर कई भवन बना कर छोड़ दिए गए हैं तो कुछ बजट के अभाव में अधूरे हैं। जो भवन बन कर तैयार हैं जिन्हें कार्यदायी संस्थाओं ने तय समय के बाद भी प्रशासन के सुपुर्द नहीं किया है लेकिन ऐसी संस्थाओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिला मुख्यालय पर सौ बेड के महिला चिकित्सालय का भवन बनकर तैयार है। इसे अभी विभाग के सुपुर्द नहीं किया गया है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री से कराने की योजना बनाई गई है। उद्घाटन न होेने के कारण इस भवन में अस्पताल शुरू नहीं हो पाया। विन्ध्याचल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो वर्ष पूर्व बना मंडलीय ड्रग्स हाउस भवन को कार्यदायी संस्था ने चिकित्सा विभाग को सौंप दिया है लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। राजगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीमारदारों को ठहरने के लिए छह लाख रुपये की लागत से भवन बना कर अधूरा छोड़ दिया गया है। जिगना में ग्राम पंचायत बघेड़ाकला के दुबहा तथा रसौली, दुगौली, नगवासी आदि गांवों में एएनएम बने सेंटर निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत नदिनी, गोगांव, गौनौरा, बरहाखुर्द आदि ग्राम सचिवालय भवन का उपयोग नहीं हो रहा है। जमालपुर ब्लॉक में डोहरी, चौकिया,हिनौतीमाफी, करजी आदि गांवों में एएनएम सेंटर के भवन तो बने हैं लेकिन इनकी हालत इतनी पतली है कि कोई इनमें बैठना नहीं चाहता है। मझवां ब्लॉक के महामलपुर में सात वर्षों से मॉडल स्कूल का भवन तैयार हो रहा है इसे वर्ष 2015 में हैंडओवर करना था लेकिन अभी भवन के प्रथम तल पर खिड़की दरवाजा नहीं लगा है।
एतिहासिक चुनार दुर्ग को देखने के लिए बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए अतिथि गृह बनाया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं होने से यह निष्प्रयोज्य साबित हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को रात्रि विश्राम करने के लिए उचित स्थान नहीं था। इस समस्या को देखते हुए अतिथि गृह का निर्माण कराया गया है।
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प्रभारी जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि कई भवन निर्माणाधीन हैं। तय समय के बाद भी कार्यदायी संस्थाओं ने उन्हें सुपुर्द नहीं किया है। प्रशासन ने ऐसे भवनों की सूची बनवाई गई है और कार्यदायी संस्थाओं को नोटिस दिया जा रहा है।
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जिले में विकास के नाम पर कई भवन बना कर छोड़ दिए गए हैं तो कुछ बजट के अभाव में अधूरे हैं। जो भवन बन कर तैयार हैं जिन्हें कार्यदायी संस्थाओं ने तय समय के बाद भी प्रशासन के सुपुर्द नहीं किया है लेकिन ऐसी संस्थाओं पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिला मुख्यालय पर सौ बेड के महिला चिकित्सालय का भवन बनकर तैयार है। इसे अभी विभाग के सुपुर्द नहीं किया गया है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री से कराने की योजना बनाई गई है। उद्घाटन न होेने के कारण इस भवन में अस्पताल शुरू नहीं हो पाया। विन्ध्याचल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो वर्ष पूर्व बना मंडलीय ड्रग्स हाउस भवन को कार्यदायी संस्था ने चिकित्सा विभाग को सौंप दिया है लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। राजगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीमारदारों को ठहरने के लिए छह लाख रुपये की लागत से भवन बना कर अधूरा छोड़ दिया गया है। जिगना में ग्राम पंचायत बघेड़ाकला के दुबहा तथा रसौली, दुगौली, नगवासी आदि गांवों में एएनएम बने सेंटर निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत नदिनी, गोगांव, गौनौरा, बरहाखुर्द आदि ग्राम सचिवालय भवन का उपयोग नहीं हो रहा है। जमालपुर ब्लॉक में डोहरी, चौकिया,हिनौतीमाफी, करजी आदि गांवों में एएनएम सेंटर के भवन तो बने हैं लेकिन इनकी हालत इतनी पतली है कि कोई इनमें बैठना नहीं चाहता है। मझवां ब्लॉक के महामलपुर में सात वर्षों से मॉडल स्कूल का भवन तैयार हो रहा है इसे वर्ष 2015 में हैंडओवर करना था लेकिन अभी भवन के प्रथम तल पर खिड़की दरवाजा नहीं लगा है।
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एतिहासिक चुनार दुर्ग को देखने के लिए बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए अतिथि गृह बनाया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं होने से यह निष्प्रयोज्य साबित हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को रात्रि विश्राम करने के लिए उचित स्थान नहीं था। इस समस्या को देखते हुए अतिथि गृह का निर्माण कराया गया है।
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प्रभारी जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि कई भवन निर्माणाधीन हैं। तय समय के बाद भी कार्यदायी संस्थाओं ने उन्हें सुपुर्द नहीं किया है। प्रशासन ने ऐसे भवनों की सूची बनवाई गई है और कार्यदायी संस्थाओं को नोटिस दिया जा रहा है।