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नहीं बनी जल प्रबंधन नीति, फिर गहराया संकट
Updated Thu, 01 Feb 2018 12:09 AM IST
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लालगंज। क्षेत्र में जल प्रबंधन का अभाव साफ दिखाई देने लगा है। जिसके कारण चार सौ के आसपास तालाब सूखने के कगार पर हैं। तालाबों के सूखने से पेयजल पर गहरा असर पड़ा है क्योंकि हैंडपंप भी पानी छोड़ने लगे हैं। ऐसी स्थिति प्रति वर्ष जनवरी से लेकर जून तक बनी रहती है बावजूद इसके कोई जलप्रबंधन की योजना नहीं बनी।उपरौध क्षेत्र में प्रतिवर्ष पानी का संकट खड़ा हो जाता है। जनवरी से लेकर जून तक तालाब नदी सूख जाते हैं,जिसके कारण एक दर्जन गांवों में टैंकर से जलापूर्ति की जाती है और हैंडपंप कीचड़युक्त पानी देने लगते हैं । खास बात है सबसे अधिक असर तालाब सूखने के कारण विकट स्थिति बनती है। रानीबारी, सहिरा, मानिकपुर, नेवढिया, बनवारी, खजुरी, लालगंज, मिश्रपुर,सेमरा,बहेरा,कोठी,बामी, पंजरा,रवारी,पतेर,धोबहा देवघटा,पिपरहा,उसरी खम्हरिया, मटहा,नवडिहवा आदि गांवों में पेयजल की समस्या उत्पन्न होने लगी है। गर्मी की तपिश के साथ पेयजल इस क्षेत्र मेंमुख्य मुद्दा हो जाएगा। तहसील दिवस के प्रार्थनापत्रों में इसकी भरमार रहती है। अप्रैल माह से ही गांव के लोग प्रधान विधायक ,सांसद के दरवाजे पर हैंडपंप लगवाने के लिए परेशान रहते हैं । सोचने वाली बात है कि लालगंज में सिरसी , मस्त्रत्त्जा, घोरी जैसे बांध रहने के बावजूद लोग पानी की समस्या से जूझते हैं । ऐसे में कारण साफ है कि पेयजल योजना की कोई कारगर नीति क्षेत्र के आधार पर नहीं बनती है।
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