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जल्द जारी होगा दुगार्वती पर डाक टिकट
Updated Thu, 19 Jul 2018 11:28 PM IST
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मिर्जापुर। अपने शौर्य से मुगल साम्राज्य को कड़ी टक्कर देने वाली गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर भारत सरकार जल्द ही डाक टिकट जारी करेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस बाबत केंद्रीय संचार राज्यमंत्री (संचार प्रभार) एवं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को पत्र लिखा है।
अनुप्रिया ने पत्र में लिखा है कि रानी दुर्गावती के तेज, शौर्य, साहस एवं बलिदान को यादगार बनाने के लिए उनके नाम पर डाक टिकट जारी करने की कृपा करें। गोंड आदिवासी समाज सहित पूरा देश वीरांगना रानी दुर्गावती के प्रति असीम श्रद्धा रखता है। हर वर्ष उनकी जयंती पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 ई को बांदा जिले के कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल के यहां हुआ था। वे अपने पिता की एकमात्र संतान थीं। दुर्गाष्टमी के दिन पैदा होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह मडावी ने अपने पुत्र दलपत शाह मडावी से विवाह करके उन्हें अपनी पुत्रवधू बनाया। दुर्भाग्यवश विवाह के चार वर्ष बाद ही राजा दलपतशाह का निधन हो गया। तब रानी दुर्गावती ने अपने तीन वर्षीय पुत्र वीरनारायण को सिंहासन पर बैठाकर संरक्षक के रूप में स्वयं शासन किया। आसफ खां के नेतृत्व में अकबर ने 24 अक्टूबर 1564 को भारी तादाद में सैनिकों के साथ रानी पर हमला किया। कम सैनिक होने के बावजूद रानी ने डटकर मुकाबला किया। बुरी तरह से घायल होने के बाद अपनी ही कटार से आत्म बलिदान कर दिया।
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अनुप्रिया ने पत्र में लिखा है कि रानी दुर्गावती के तेज, शौर्य, साहस एवं बलिदान को यादगार बनाने के लिए उनके नाम पर डाक टिकट जारी करने की कृपा करें। गोंड आदिवासी समाज सहित पूरा देश वीरांगना रानी दुर्गावती के प्रति असीम श्रद्धा रखता है। हर वर्ष उनकी जयंती पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 ई को बांदा जिले के कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल के यहां हुआ था। वे अपने पिता की एकमात्र संतान थीं। दुर्गाष्टमी के दिन पैदा होने के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह मडावी ने अपने पुत्र दलपत शाह मडावी से विवाह करके उन्हें अपनी पुत्रवधू बनाया। दुर्भाग्यवश विवाह के चार वर्ष बाद ही राजा दलपतशाह का निधन हो गया। तब रानी दुर्गावती ने अपने तीन वर्षीय पुत्र वीरनारायण को सिंहासन पर बैठाकर संरक्षक के रूप में स्वयं शासन किया। आसफ खां के नेतृत्व में अकबर ने 24 अक्टूबर 1564 को भारी तादाद में सैनिकों के साथ रानी पर हमला किया। कम सैनिक होने के बावजूद रानी ने डटकर मुकाबला किया। बुरी तरह से घायल होने के बाद अपनी ही कटार से आत्म बलिदान कर दिया।
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