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तीन करोड़ की लागत से हो रही दुर्ग की दरकती दीवारों की मरम्मत
Updated Wed, 30 Aug 2017 05:28 PM IST
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चुनार। चुनार दुर्ग की दरकती दीवारों को लंदन के इंजीनियर की तकनीकी सहायता से संरक्षित किया जा रहा है। इसका काम तेजी से चल रहा है और सितंबर के अंत तक कौम पूरा होने की उम्मीद है।
चुनार का किला पर्यटनों के आकर्षण का केंद्र रहा है। मगर समय के साथ इसकी दीवारें दरकने लगी थीं। किला पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। गिरती दीवारों को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग ने तीन करोड़ रुपये जारी किए हैं। लंदन से आये विशेषज्ञ जोसवा जोजेफ हाट के निर्देशन में संरक्षण का काम चल रहा है। सिंटेक कंपनी इंजीनयर नितिन बहल ने बताया कि दुर्ग की दीवारें पुरानी होने के कारण खिसकने लगी थीं और भीतर से खोखली होकर एक तरफ झुक गई थीं। उनको गिरने से बचाने के लिए एंकरिंग एवम ग्रोउंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दीवार में छेद करके स्टेनलेस स्टील से बांधा जा रहा है। चूने आदि से दीवारों को ठोस बनाया जा रहा है ताकि वे मूल स्थान पर मजबूती से खड़ी रहें। इस काम में दीवारों के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं होगा और वे मूल रूप में संरक्षित रहेंगी।
चुनार का किला पर्यटनों के आकर्षण का केंद्र रहा है। मगर समय के साथ इसकी दीवारें दरकने लगी थीं। किला पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। गिरती दीवारों को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग ने तीन करोड़ रुपये जारी किए हैं। लंदन से आये विशेषज्ञ जोसवा जोजेफ हाट के निर्देशन में संरक्षण का काम चल रहा है। सिंटेक कंपनी इंजीनयर नितिन बहल ने बताया कि दुर्ग की दीवारें पुरानी होने के कारण खिसकने लगी थीं और भीतर से खोखली होकर एक तरफ झुक गई थीं। उनको गिरने से बचाने के लिए एंकरिंग एवम ग्रोउंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दीवार में छेद करके स्टेनलेस स्टील से बांधा जा रहा है। चूने आदि से दीवारों को ठोस बनाया जा रहा है ताकि वे मूल स्थान पर मजबूती से खड़ी रहें। इस काम में दीवारों के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं होगा और वे मूल रूप में संरक्षित रहेंगी।
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