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पोषणयुक्त खाद्य पदार्थो के लिए तकनीक व शोध जरूरी: प्रो.मैरी
Updated Mon, 19 Feb 2018 11:59 PM IST
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बीएचयू के दक्षिणी परिसर में आयोजित सम्मेलन में उपस्थित प्रोफेसर
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बरकछा। मेडिकल, फूड और फार्मा के क्षेत्र में भारत ने हाल के वर्षों में काफी प्रगति की है। पौष्टिक खाद्य पदार्थों को मुहैया कराने में तकनीक और शोध की जरूरत है। ये बातें बरकछा स्थित बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन सोमवार को उपासला विश्वविद्यालय स्वीडन की प्रोफेसर मैरी ऐलेन ने कहीं।
सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपासला विश्वविद्यालय स्वीडन की प्रो. मैरी ऐलन ने महामना पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसमें 11 देशों के 600 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस सेमिनार में लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। आचार्य प्रभारी प्रो. साकेत कुशवाहा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उत्तम कृषि, श्रम एवं औद्योगिक गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भोजन एवं खाद्य पदार्थों में खनिज व पोषक तत्वों को बरकरार रखने की बात करते हुए खाद्य प्रसंस्करण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में जहां दवाओं की बात होती है वहीं विदेशों में न्यूट्रास्यूटिकल (भोजन के माध्यम से संतुलित पोषण एवं पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारण) का प्रचलन बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आरके खंडाल ने देश के सत्व एवं सात्विक गुणों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। पोखचाल विश्वविद्यालय, दक्षिणी कोरिया के वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान मिश्र सेमिनार की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी। नोडल अधिकारी डॉ. रत्न शंकर मिश्र ने सेमिनार के लक्ष्य एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला। धन्यवाद आयोजन सचिव डा. राघवेन्द्र रमन मिश्र व संचालन सुश्री प्रियंका ने किया।
राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में कार्यक्रम के दौरान डीडीयू कौशल केंद्र के विभिन्न पाठ्यक्रमों के मेधावी छात्र-छात्राओं को मेरिट मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही कार्यक्रम के पहले दिन तीन तकनीकि सत्रों में अमेरिका के डा. असीम सुरेंद्रों सिंह, नेपाल की डा. स्मिता श्रेष्ठ की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान प्रो एसके स्वाईन, डा. मनोज कुमार सिंह, डा. अनिल कुमार सिंह, डा. नवीन कुमार, डा. अपूर्व मुखर्जी, डा. कौस्तव चटर्जी, डा. कृष्ण कांत, डा. रजनी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपासला विश्वविद्यालय स्वीडन की प्रो. मैरी ऐलन ने महामना पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसमें 11 देशों के 600 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस सेमिनार में लगभग 200 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। आचार्य प्रभारी प्रो. साकेत कुशवाहा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उत्तम कृषि, श्रम एवं औद्योगिक गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भोजन एवं खाद्य पदार्थों में खनिज व पोषक तत्वों को बरकरार रखने की बात करते हुए खाद्य प्रसंस्करण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में जहां दवाओं की बात होती है वहीं विदेशों में न्यूट्रास्यूटिकल (भोजन के माध्यम से संतुलित पोषण एवं पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारण) का प्रचलन बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आरके खंडाल ने देश के सत्व एवं सात्विक गुणों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। पोखचाल विश्वविद्यालय, दक्षिणी कोरिया के वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान मिश्र सेमिनार की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी। नोडल अधिकारी डॉ. रत्न शंकर मिश्र ने सेमिनार के लक्ष्य एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला। धन्यवाद आयोजन सचिव डा. राघवेन्द्र रमन मिश्र व संचालन सुश्री प्रियंका ने किया।
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राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में कार्यक्रम के दौरान डीडीयू कौशल केंद्र के विभिन्न पाठ्यक्रमों के मेधावी छात्र-छात्राओं को मेरिट मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही कार्यक्रम के पहले दिन तीन तकनीकि सत्रों में अमेरिका के डा. असीम सुरेंद्रों सिंह, नेपाल की डा. स्मिता श्रेष्ठ की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान प्रो एसके स्वाईन, डा. मनोज कुमार सिंह, डा. अनिल कुमार सिंह, डा. नवीन कुमार, डा. अपूर्व मुखर्जी, डा. कौस्तव चटर्जी, डा. कृष्ण कांत, डा. रजनी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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