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श्याम नहीं घर आए बदरा घिरी-घिरी आए ना...
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:27 AM IST
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मिर्जापुर। विश्व सनातन संस्कृति रक्षा मंच के तत्वावधान में शनिवार को प्राचीन बाबा बूढ़ेनाथ जी के मंदिर परिसर में भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जनपद के ख्यातिलब्ध कला-साधकों ने मधुर भजनों को प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया, वहीं गायकों ने एक से बढ़कर एक कजली गायन की प्रस्तुति कर सावनी बयार बहाई। इस मौके पर बाबा बूढ़ेेनाथ जी का तरह-तरह के पुष्पों से किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन कर श्रद्घालु निहाल हो उठे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के महंत श्री योगानंद गिरी जी महाराज ने विधिवत बाबा भोलेनाथ जी का पूजन-अर्चन कर किया। महाराज जी ने बताया कि सावन का महीना धर्म का मास माना गया है। संतों ने चतुर्मास विधान में चार महीने का वर्णन करते हुए चार फलों को देने वाला बताया है, जिसमें चातुर्मास का प्रथम महीना सावन, द्वितीय भाद्रपद, तृतीय आश्विन एवं चौथा कार्तिक माह है और इसके फल क्रमश: धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष हैं। बताया कि मोक्ष की प्राप्ति धर्म से प्रारंभ होती है और धर्म का मास ही सावन है। भजन संध्या में सुप्रसिद्घ लोक गायिका कुसुम पांडेय ने- सखि री श्याम नहीं घर आए बदरा घिरी-घिरी आए ना..तथा ओ मईया झूले लीं रे झुलनवां..प्रस्तुत कर भक्तों को खूब झुमाया। लोकगायक शिवलाल गुप्त ने- तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे..सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गायक बलवंत सिंह ने- चदरिया झीनी रे झीनी..तथा गायक जयंत सिंह ने- मोहे लागी लगन गुरु चरणन की..प्रस्तुत कर गुरु महिमा का बखान किया। कलाकारों के साथ हारमोनियम पर ओम प्रकाश दूबे उर्फ मिंटू, तबला पर झब्बू लाल शास्त्री , नाल पर पंचम लाल आदि ने कुशल संगत किया। इस दौरान राह़ुल बरनवाल, सुशील मुसद्दी, गौरव ऊमर, उमा पांडेय, राजेश कसेरा, सुधानंद गिरी, महेश गुप्त, दाऊ दयाल पाठक, रविंद्र आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के महंत श्री योगानंद गिरी जी महाराज ने विधिवत बाबा भोलेनाथ जी का पूजन-अर्चन कर किया। महाराज जी ने बताया कि सावन का महीना धर्म का मास माना गया है। संतों ने चतुर्मास विधान में चार महीने का वर्णन करते हुए चार फलों को देने वाला बताया है, जिसमें चातुर्मास का प्रथम महीना सावन, द्वितीय भाद्रपद, तृतीय आश्विन एवं चौथा कार्तिक माह है और इसके फल क्रमश: धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष हैं। बताया कि मोक्ष की प्राप्ति धर्म से प्रारंभ होती है और धर्म का मास ही सावन है। भजन संध्या में सुप्रसिद्घ लोक गायिका कुसुम पांडेय ने- सखि री श्याम नहीं घर आए बदरा घिरी-घिरी आए ना..तथा ओ मईया झूले लीं रे झुलनवां..प्रस्तुत कर भक्तों को खूब झुमाया। लोकगायक शिवलाल गुप्त ने- तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे..सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गायक बलवंत सिंह ने- चदरिया झीनी रे झीनी..तथा गायक जयंत सिंह ने- मोहे लागी लगन गुरु चरणन की..प्रस्तुत कर गुरु महिमा का बखान किया। कलाकारों के साथ हारमोनियम पर ओम प्रकाश दूबे उर्फ मिंटू, तबला पर झब्बू लाल शास्त्री , नाल पर पंचम लाल आदि ने कुशल संगत किया। इस दौरान राह़ुल बरनवाल, सुशील मुसद्दी, गौरव ऊमर, उमा पांडेय, राजेश कसेरा, सुधानंद गिरी, महेश गुप्त, दाऊ दयाल पाठक, रविंद्र आदि मौजूद रहे।
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