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पारा 45 डिग्री के पार, सड़कों पर पसरा सन्नाटा
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मिर्जापुर। गर्मी अब अपने पूरे शबाब पर है। रविवार को तो दिन भर ऐसी लू चली कि लोग अपने घरों से निकलने की हिम्मत ही नहीं कर सके। देर शाम तक यही स्थिति रही। अधिकांश चौराहों व सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
इस समय वैशाख का महीना चल रहा है। गर्मी का हाल यह है कि पारा 45 के पार पहुंच जा रहा है। लोगों का कहना है कि ऐसी भीषण गर्मी कई सालों बाद पड़ रही है। जब अभी ही यह स्थिति है तो जेठ महीने में क्या होगा। हरे पेड़ों के नीचे तक में लू के थपेड़े लग रहे थे। लोगों के शरीर पर कपड़े नहीं ठहर रहे थे लेकिन इस डर से कि कहीं लू न लग जाए। लोग पूरी आस्तीन के कपड़े पहने हुए थे। यदि बहुत आवश्यक हुआ तो लोग पूरे शरीर को पूरी तरह ढंक कर ही निकल रहे थे। युवतियां तो शरीर ढंके हुए थी ही आम आदमी भी अपने पूरे शरीर को सफेद कपड़ों से ढंक कर बहुत आवश्यक होने पर ही बाहर निकल रहे थे।
इस मौसम में कोढ़ का खाज का काम किया बिजली ने। दिन भर बिजली की आंखमिचौली से लोग हलाकान रहे। न तो वह कूलर का आनंद ले सके और न ही पंखे का। दिन भर हो रही बिजली की ट्रिपिंग से लोगों के इन्वर्टर भी बोल गए। किसी तरह शाम हुई तो लोगों को कुछ राहत मिली। बिजली न रहने से अधिकांश दुकानों में शीतल पेय भी नहीं मिल सका। लोगों के फ्रीज ने जवाब दे दिया था।
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दिन भर की तपन के बाद शाम को गंगा के किनारे लोगों की भीड़ जुटी। गंगा तटों पर बैठकर लोगों ने गर्मी को दूर करने का प्रयास किया। गंगा के पानी से मुंह- हाथ धोकर ताजी हवा लेने का प्रयास किया। भजन कीर्तन की मंडली में बैठ कर भी लोगों ने गर्मी को भूलने का प्रयास किया।
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इस समय वैशाख का महीना चल रहा है। गर्मी का हाल यह है कि पारा 45 के पार पहुंच जा रहा है। लोगों का कहना है कि ऐसी भीषण गर्मी कई सालों बाद पड़ रही है। जब अभी ही यह स्थिति है तो जेठ महीने में क्या होगा। हरे पेड़ों के नीचे तक में लू के थपेड़े लग रहे थे। लोगों के शरीर पर कपड़े नहीं ठहर रहे थे लेकिन इस डर से कि कहीं लू न लग जाए। लोग पूरी आस्तीन के कपड़े पहने हुए थे। यदि बहुत आवश्यक हुआ तो लोग पूरे शरीर को पूरी तरह ढंक कर ही निकल रहे थे। युवतियां तो शरीर ढंके हुए थी ही आम आदमी भी अपने पूरे शरीर को सफेद कपड़ों से ढंक कर बहुत आवश्यक होने पर ही बाहर निकल रहे थे।
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इस मौसम में कोढ़ का खाज का काम किया बिजली ने। दिन भर बिजली की आंखमिचौली से लोग हलाकान रहे। न तो वह कूलर का आनंद ले सके और न ही पंखे का। दिन भर हो रही बिजली की ट्रिपिंग से लोगों के इन्वर्टर भी बोल गए। किसी तरह शाम हुई तो लोगों को कुछ राहत मिली। बिजली न रहने से अधिकांश दुकानों में शीतल पेय भी नहीं मिल सका। लोगों के फ्रीज ने जवाब दे दिया था।
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दिन भर की तपन के बाद शाम को गंगा के किनारे लोगों की भीड़ जुटी। गंगा तटों पर बैठकर लोगों ने गर्मी को दूर करने का प्रयास किया। गंगा के पानी से मुंह- हाथ धोकर ताजी हवा लेने का प्रयास किया। भजन कीर्तन की मंडली में बैठ कर भी लोगों ने गर्मी को भूलने का प्रयास किया।