{"_id":"59d927434f1c1bb6678b4a29","slug":"161507403587-mirzapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भक्ति के सागर में डूबकर ही भगवान को पाया जा सकता है:चिन्मयानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भक्ति के सागर में डूबकर ही भगवान को पाया जा सकता है:चिन्मयानंद
Updated Sun, 08 Oct 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
मिर्जापुर। सिटी क्लब में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन स्वामी चिन्मयानंद बापू ने कहा कि भक्ति के सागर में ही डूबकर भगवान को पाया जा सकता है। जैसे दूध में घी रहने के बावजूद दिखाई नहीं देता और उसे निकालने के लिए कठिन परिश्रम करनी पड़ती है। उसी प्रकार भगवान हर जगह विद्यमान हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन की पूजा कराई थी। परमात्मा सभी जगह विद्यमान हैं। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्घालु कथा का रसपान करने में मग्न रहे। कथा में बापू ने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म के बाद नंद बाबा महामना हो गए। उन्होंने एक लाख गाय दान दिया और जिसने जो भी इच्छा प्रकट किया उसे प्रदान किया। कथा में बापू ने बताया कि भगवान कृष्ण ने कंस के द्वारा भेजे गए पूतना, अघासुर, बकासुर जैसे राक्षसों का संहार किया। बाद में गर्गाचार्य ऋषि के द्वारा भगवान का नामकरण किया गया। कथा में कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों का नामकरण ऐसा रखना चाहिए कि हर उम्र में नाम पुकारने में अच्छा लगे। बापू ने अंग्रेजी नामों का विरोध करते हुए कहा कि जो लोग टीवी में आने वाले धारावाहिक को देखकर बच्चों का नामकरण करते हैं, वो हमारे सनातन धर्म की परंपरा नहीं है। कथा में अजामिल नाम के भक्त की कथा सुनाई। इसके बाद भगवान कृष्ण के बाल्यावस्था में माखन चोरी का आनंदमय कथा सुनाया। इसके अलावा यमलार्जन, वृक्षों का उद्घार, वृंदावन की धरा पर गौ सेवा, काली नाग का निग्रह और इंद्र के अहंकर को तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण के द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा सुनाई। इस दौरान यजमान रामजी मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, निलेश शुक्ला, रोहित शुक्ला, के के दूबे, आल्हा सिंह, ठक्कर सिंह, रमाशंकर दूबे आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन की पूजा कराई थी। परमात्मा सभी जगह विद्यमान हैं। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्घालु कथा का रसपान करने में मग्न रहे। कथा में बापू ने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म के बाद नंद बाबा महामना हो गए। उन्होंने एक लाख गाय दान दिया और जिसने जो भी इच्छा प्रकट किया उसे प्रदान किया। कथा में बापू ने बताया कि भगवान कृष्ण ने कंस के द्वारा भेजे गए पूतना, अघासुर, बकासुर जैसे राक्षसों का संहार किया। बाद में गर्गाचार्य ऋषि के द्वारा भगवान का नामकरण किया गया। कथा में कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों का नामकरण ऐसा रखना चाहिए कि हर उम्र में नाम पुकारने में अच्छा लगे। बापू ने अंग्रेजी नामों का विरोध करते हुए कहा कि जो लोग टीवी में आने वाले धारावाहिक को देखकर बच्चों का नामकरण करते हैं, वो हमारे सनातन धर्म की परंपरा नहीं है। कथा में अजामिल नाम के भक्त की कथा सुनाई। इसके बाद भगवान कृष्ण के बाल्यावस्था में माखन चोरी का आनंदमय कथा सुनाया। इसके अलावा यमलार्जन, वृक्षों का उद्घार, वृंदावन की धरा पर गौ सेवा, काली नाग का निग्रह और इंद्र के अहंकर को तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण के द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा सुनाई। इस दौरान यजमान रामजी मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, निलेश शुक्ला, रोहित शुक्ला, के के दूबे, आल्हा सिंह, ठक्कर सिंह, रमाशंकर दूबे आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन