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त्रियाराज का हुआ मंचन
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मिर्जापुर। नगर के सिटी कोतवाली के पीछे स्थित गुदड़ी में गुरुवार को होली पर परंपरागत रूप से आयोजित होने वाली भंड़ई के साथ नाटक का मंचन किया गया। इस अवसर पर कलाकारों ने त्रियाराज नामक नाटक का मंचन किया।
गुदड़ी में दशकों से होली पर्व पर तीन दिवसीय भंड़ई का आयोजन होता है। इसके तहत हंसने- हंसाने वाले कार्यक्रमों के साथ ही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले नाटकों का भी मंचन किया जाता है। उसी क्रम में यह आयोजन किया गया था। गुरुवार की रात भारत माता की प्रार्थना के बाद नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक में कामाख्या देश में रानी तिलोथना का राज्य दिखाया गया जिसमें पुरुषों का प्रवेश वर्जित था। इसके लिए तिलस्म का निर्माण किया गया था। गुरु गोरखनाथ के गुरु मच्छेंद्रनाथ ने इस तिलस्म को तोड़ा। इसके बीच- बीच में हास्य कणिकाएं भी प्रस्तुत की गई। नाटक में शुभम कसेरा, बजरंगी, सोनू, बलराम, शिवम, किशन, बाबा लाल, अनंतराम कसेरा आदि ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई। त्रिभुवनराम बिंद्रा आदि थे।
मिर्जापुर। होली पर्व के उपलक्ष्य में शुक्रवार को नगर में बरात निकाली गई। अबीर- गुलाल उड़ाते व डीजे की धुन पर डांस करते लोग निकले। बरात में राधा कृष्ण की झांकी भी निकाली गई। बड़ी माता से शुरू हुई बरात नगर का चक्रमण करते हुए कदमतर पर संपन्न हुई।
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गुदड़ी में दशकों से होली पर्व पर तीन दिवसीय भंड़ई का आयोजन होता है। इसके तहत हंसने- हंसाने वाले कार्यक्रमों के साथ ही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले नाटकों का भी मंचन किया जाता है। उसी क्रम में यह आयोजन किया गया था। गुरुवार की रात भारत माता की प्रार्थना के बाद नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक में कामाख्या देश में रानी तिलोथना का राज्य दिखाया गया जिसमें पुरुषों का प्रवेश वर्जित था। इसके लिए तिलस्म का निर्माण किया गया था। गुरु गोरखनाथ के गुरु मच्छेंद्रनाथ ने इस तिलस्म को तोड़ा। इसके बीच- बीच में हास्य कणिकाएं भी प्रस्तुत की गई। नाटक में शुभम कसेरा, बजरंगी, सोनू, बलराम, शिवम, किशन, बाबा लाल, अनंतराम कसेरा आदि ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई। त्रिभुवनराम बिंद्रा आदि थे।
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मिर्जापुर। होली पर्व के उपलक्ष्य में शुक्रवार को नगर में बरात निकाली गई। अबीर- गुलाल उड़ाते व डीजे की धुन पर डांस करते लोग निकले। बरात में राधा कृष्ण की झांकी भी निकाली गई। बड़ी माता से शुरू हुई बरात नगर का चक्रमण करते हुए कदमतर पर संपन्न हुई।
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