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सैकड़ों किसानों का भुगतान अभी भी अधर में
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मिर्जापुर। जिले में धान क्रय केंद्रों से खरीदारी हुई और किसानों को लाभान्वित करने का दावा भी किया गया लेकिन बहुत से किसानों को आजतक धान बिक्री का भुगतान नहीं हो सका है। उनकी होली सूखी ही बीत गई। बच्चों को न तो नए कपड़े ही मिल सके, न ही वह त्यौहार का आनंद उठा सके। अकेले पीसीएफ को आठ करोड़ रुपये का भुगतान करना है।
जिले में इस बार एक नवंबर से 28 फरवरी तक 93 केंद्रों पर धान की खरीद की गई। इस बार जिले के लिए दो लाख 59 हजार टन की खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य के सापेक्ष जिले में 115 फीसद धान की खरीद अर्थात तीन लाख टन धान की खरीद की गई। इससे 34 हजार 790 किसान लाभान्वित हुए। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन असली समस्या इसके बाद शुरू हुई। अधिकतर किसानों को उनके धान के मूल्य का भुगतान नहीं हो सका। एक माह के बाद भी उनको भुगतान नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि इन किसानों की होली फीकी रही। इसमें एक दो किसान नहीं बल्कि सैकड़ों किसान शामिल हैं। उनका करोड़ों का भुगतान बकाया है लेकिन आज तक भुगतान नहीं हो सका है। यदि एक सप्ताह के अंदर भुगतान नहीं हुआ तो फिर उनका मामला लंबा लटक सकता है क्योंकि एक अप्रैल से धान की खरीद का सीजन शुरू हो रहा है।
कुछ किसानों का भुगतान बाकी है। पीसीएफ को आठ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इसी प्रकार खाद्य विभाग का भी कुछ भुगतान बकाया है। इसकी वजह कुछ फीडिंग का न होना है। शीघ्र ही भुगतान कराया जाएगा। - अजित कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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धान खरीद एक नजर में
लक्ष्य - दो लाख 59 हजार टन
खरीद- तीन लाख टन, 115 फीसदी
लाभान्वित किसान- 34 हजार सात सौ 90
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जिले में इस बार एक नवंबर से 28 फरवरी तक 93 केंद्रों पर धान की खरीद की गई। इस बार जिले के लिए दो लाख 59 हजार टन की खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य के सापेक्ष जिले में 115 फीसद धान की खरीद अर्थात तीन लाख टन धान की खरीद की गई। इससे 34 हजार 790 किसान लाभान्वित हुए। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन असली समस्या इसके बाद शुरू हुई। अधिकतर किसानों को उनके धान के मूल्य का भुगतान नहीं हो सका। एक माह के बाद भी उनको भुगतान नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि इन किसानों की होली फीकी रही। इसमें एक दो किसान नहीं बल्कि सैकड़ों किसान शामिल हैं। उनका करोड़ों का भुगतान बकाया है लेकिन आज तक भुगतान नहीं हो सका है। यदि एक सप्ताह के अंदर भुगतान नहीं हुआ तो फिर उनका मामला लंबा लटक सकता है क्योंकि एक अप्रैल से धान की खरीद का सीजन शुरू हो रहा है।
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कुछ किसानों का भुगतान बाकी है। पीसीएफ को आठ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इसी प्रकार खाद्य विभाग का भी कुछ भुगतान बकाया है। इसकी वजह कुछ फीडिंग का न होना है। शीघ्र ही भुगतान कराया जाएगा। - अजित कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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धान खरीद एक नजर में
लक्ष्य - दो लाख 59 हजार टन
खरीद- तीन लाख टन, 115 फीसदी
लाभान्वित किसान- 34 हजार सात सौ 90