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गंगा का उफान देख सहमे लोग
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:56 AM IST
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मिर्जापुर। वर्तमान समय गंगा का तेज उफान देखकर जनपद के तटवर्तीय इलाकों में बसे कई गांव के ग्रामीणों की धुकधुकी बढ़ने लगी है। रविवार को गंगा का जलस्तर 70.1 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि शनिवार को 69.524 मीटर रहा, ऐसे में तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे के हिसाब से गंगा का जलस्तर बढ़ रही थीं। गंगा की तेज धार को देखते हुए जिला प्रशासन भी बाढ़ से निपटने की तैयारी में जुट गया है, वहीं तटवर्तीय इलाकों के लोग भी सक्रिय होकर सुरक्षित ठौर-ठिकानों की तलाश में लग गए हैं।
गंगा खतरे के निशान से अभी करीब सात मीटर नीचे हैं, जिसको लेकर तटवर्तीय इलाकों में उतनी बेचैनी अभी नहीं देखी जा रही है, लेकिन गंगा की धार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में जहां पशुपालक अपने पशुओं को सही स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी करने लगे हैं, वहीं निचले हिस्सों में बसे गांवों के लोग गंगा का जलस्तर देख परेशान होने लगे हैं। जनपद के छानबे, विंध्याचल, नगर, पड़री, सीखड़, मझवां, चुनार एवं नरायनपुर के तटवर्तीय गांवों में बसे ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा में नाव के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, वहीं जनपद के कई इलाकों में बाढ़ चौकियां भी स्थापित करा दी गई हैं। गंगा में बढ़ाव के चलते पूर्णिमा के दिन विंध्याचल में आए श्रद्घालुओं को भी स्नान-ध्यान करने में परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि घाटों पर स्नान करने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से बैरिकेडिंग लगाई गई थी। नगर के बरियाघाट, पक्काघाट, बदलीघाट, संकठाघाट, दाऊजी घाट, सुंदरघाट, कचहरी घाट, नारघाट सहित अन्य कई घाटों पर नगरवासी गंगा के जलस्तर को देखने पहुंचे हुए थे। गंगा के जलस्तर में प्रतिदिन हो रही बढ़ोत्तरी के कारण गंगा किनारे कटान भी तेज गति से होने लगा है, जिससे घाट किनारे के प्राचीन भवनों व मंदिरों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
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गंगा खतरे के निशान से अभी करीब सात मीटर नीचे हैं, जिसको लेकर तटवर्तीय इलाकों में उतनी बेचैनी अभी नहीं देखी जा रही है, लेकिन गंगा की धार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में जहां पशुपालक अपने पशुओं को सही स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी करने लगे हैं, वहीं निचले हिस्सों में बसे गांवों के लोग गंगा का जलस्तर देख परेशान होने लगे हैं। जनपद के छानबे, विंध्याचल, नगर, पड़री, सीखड़, मझवां, चुनार एवं नरायनपुर के तटवर्तीय गांवों में बसे ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा में नाव के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, वहीं जनपद के कई इलाकों में बाढ़ चौकियां भी स्थापित करा दी गई हैं। गंगा में बढ़ाव के चलते पूर्णिमा के दिन विंध्याचल में आए श्रद्घालुओं को भी स्नान-ध्यान करने में परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि घाटों पर स्नान करने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से बैरिकेडिंग लगाई गई थी। नगर के बरियाघाट, पक्काघाट, बदलीघाट, संकठाघाट, दाऊजी घाट, सुंदरघाट, कचहरी घाट, नारघाट सहित अन्य कई घाटों पर नगरवासी गंगा के जलस्तर को देखने पहुंचे हुए थे। गंगा के जलस्तर में प्रतिदिन हो रही बढ़ोत्तरी के कारण गंगा किनारे कटान भी तेज गति से होने लगा है, जिससे घाट किनारे के प्राचीन भवनों व मंदिरों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
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