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बिना अनुमति प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को पुलिस ने पकड़ा
Updated Thu, 24 May 2018 01:04 AM IST
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तहसील मुख्यालय चुनार पर बुधवार को बिना अनुमति धरना प्रदर्शन करने आए लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया और कोतवाली ले आई। इसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों द्वारा माफीनामे के बाद कोतवाली से छोड़ दिया।
तहसील क्षेत्र के पौनी गांव के दर्जनों ग्रामीण मांगों को लेकर तहसील मुख्यालय पर दोपहर पहुंचकर धरना प्रदर्शन और नारेबाजी करने लगे। वहीं कार्यालय में लोगों की फरियाद सुन रहे उपजिलाधिकारी अविनाश त्रिपाठी ने शोर शराबा सुनकर कर्मचारियों को भेजकर शोर शराबा करने से मना किया। शोर शराबा बंद नहीं होने पर कुछ देर बाद एसडीएम चुनार भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम को ग्रामीणों ने मामला बताने की बजाए नारेबाजी करने लगे। इस पर उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों से धरना प्रदर्शन किए जाने का अनुमति पत्र मांगा, जिस पर ग्रामीण नही दिखा पाए। एसडीएम ने कहा कि इस प्रकार बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन कानून के विरुद्ध है। धरना प्रदर्शन समाप्तकर समस्या बताएं लेकिन ग्रामीण अपनी जिद्द पर अड़े रहे। मामला गंभीर होते देख उपजिलाधिकारी ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ग्रामीणों को वाहन में बैठाकर साथ लाई। उपजिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने भविष्य में इस तरह से बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन नही किये जाने की माफीनामा के साथ कोतवाली से छोड़ दिया। उपजिलाधिकारी ने बताया कि गांव में किसी का व्यक्तिगत तालाब है, उसकी पैमाइस को लेकर कोई विवाद बताया जा रहा जबकि उसकी पैमाइस पूर्व में भी कराई गयी है और प्रदर्शनकारियों की संतुष्टि के लिए मैने पुन: पैमाइस कराने की बात कही है।
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तहसील क्षेत्र के पौनी गांव के दर्जनों ग्रामीण मांगों को लेकर तहसील मुख्यालय पर दोपहर पहुंचकर धरना प्रदर्शन और नारेबाजी करने लगे। वहीं कार्यालय में लोगों की फरियाद सुन रहे उपजिलाधिकारी अविनाश त्रिपाठी ने शोर शराबा सुनकर कर्मचारियों को भेजकर शोर शराबा करने से मना किया। शोर शराबा बंद नहीं होने पर कुछ देर बाद एसडीएम चुनार भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम को ग्रामीणों ने मामला बताने की बजाए नारेबाजी करने लगे। इस पर उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों से धरना प्रदर्शन किए जाने का अनुमति पत्र मांगा, जिस पर ग्रामीण नही दिखा पाए। एसडीएम ने कहा कि इस प्रकार बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन कानून के विरुद्ध है। धरना प्रदर्शन समाप्तकर समस्या बताएं लेकिन ग्रामीण अपनी जिद्द पर अड़े रहे। मामला गंभीर होते देख उपजिलाधिकारी ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ग्रामीणों को वाहन में बैठाकर साथ लाई। उपजिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने भविष्य में इस तरह से बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन नही किये जाने की माफीनामा के साथ कोतवाली से छोड़ दिया। उपजिलाधिकारी ने बताया कि गांव में किसी का व्यक्तिगत तालाब है, उसकी पैमाइस को लेकर कोई विवाद बताया जा रहा जबकि उसकी पैमाइस पूर्व में भी कराई गयी है और प्रदर्शनकारियों की संतुष्टि के लिए मैने पुन: पैमाइस कराने की बात कही है।
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