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धन उगाही करने वाले 11 स्वास्थ्यकर्मी होंगे निलंबित
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मिर्जापुर। जिला महिला चिकित्सालय परिसर में मरीजों से धन उगाही करने, भ्रष्टाचार फैलाने तथा राजकीय सेवा के प्रति कर्तव्यनिष्ठ न होने पर 11 अस्पताल कर्मियों का वेतन रोकते हुए उन्हें निलंबित करने की संस्तुति की गई है। अपर निदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विंध्याचल मंडल डॉ आरपी पांडेय ने कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है।
लॉकडाउन के दौरान महिला अस्पताल में डिलेवरी के लिए पैसे मांगे जाने का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें प्रसूता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पैसे न देने के चलते डिलेवरी में देरी हुई और जच्चा बच्चा की जान को जोखिम में डाली गई। भाजपा नेता राम कुमार विश्वकर्मा की शिकायत पर जिलाधिकारी प्रवीण कुमार ने सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह से मामले की जांच कराई थी और साथ ही जच्चा बच्चा को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी के एक अस्पताल भेजा था। जांच रिपोर्ट तो आ गई पर इसके आलोक में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट इरशाद अली ने शिकायती पत्र 28 जुलाई व एक और संशोधित पत्र प्रशासन को भेजा। मामले की जांच अपर निदेशक ने की और जिला महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर दोषी 11 चिकित्साकर्मियों को निर्देश दिया गया कि तीन कार्य दिवस के भीतर वह अपना पक्ष रखें। कोई भी कर्मी एडी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ। मामले में पुन: दोषियों को एक मौका दिया गया। सीएमएस को निर्देशित किया गया कि सभी दोषी अपना बचाव पक्ष रखें। इनमें से आठ चिकित्साकर्मियों ने ही स्पष्टीकरण दिया जिसको संतोषप्रद नहीं पाया गया। सभी चिकित्सा कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें दूरस्त मंडल के किसी जनपद में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।
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केवल छोटे कर्मियों को बनाया जा रहा निशाना
- वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर खूब चर्चा हुई। जांच हुई पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। जांच की जद में भी केवल अस्पताल के छोटे कर्मचारी हैं। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को भेजे गए पत्र में एडी ने जिक्र किया है कि जिला महिला अस्पताल में डिलेवरी के नाम पर धन उगाही की शिकायत आए दिन प्राप्त होती है। एडी ने पत्र में यह भी लिखा है कि सात सितंबर 2018 को अस्पताल का निरीक्षण करने के दौरान डिलेवरी के नाम पर उगाही की शिकायत प्राप्त हुई थी।
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लॉकडाउन के दौरान महिला अस्पताल में डिलेवरी के लिए पैसे मांगे जाने का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें प्रसूता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पैसे न देने के चलते डिलेवरी में देरी हुई और जच्चा बच्चा की जान को जोखिम में डाली गई। भाजपा नेता राम कुमार विश्वकर्मा की शिकायत पर जिलाधिकारी प्रवीण कुमार ने सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह से मामले की जांच कराई थी और साथ ही जच्चा बच्चा को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी के एक अस्पताल भेजा था। जांच रिपोर्ट तो आ गई पर इसके आलोक में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट इरशाद अली ने शिकायती पत्र 28 जुलाई व एक और संशोधित पत्र प्रशासन को भेजा। मामले की जांच अपर निदेशक ने की और जिला महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर दोषी 11 चिकित्साकर्मियों को निर्देश दिया गया कि तीन कार्य दिवस के भीतर वह अपना पक्ष रखें। कोई भी कर्मी एडी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ। मामले में पुन: दोषियों को एक मौका दिया गया। सीएमएस को निर्देशित किया गया कि सभी दोषी अपना बचाव पक्ष रखें। इनमें से आठ चिकित्साकर्मियों ने ही स्पष्टीकरण दिया जिसको संतोषप्रद नहीं पाया गया। सभी चिकित्सा कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें दूरस्त मंडल के किसी जनपद में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।
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केवल छोटे कर्मियों को बनाया जा रहा निशाना
- वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर खूब चर्चा हुई। जांच हुई पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। जांच की जद में भी केवल अस्पताल के छोटे कर्मचारी हैं। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को भेजे गए पत्र में एडी ने जिक्र किया है कि जिला महिला अस्पताल में डिलेवरी के नाम पर धन उगाही की शिकायत आए दिन प्राप्त होती है। एडी ने पत्र में यह भी लिखा है कि सात सितंबर 2018 को अस्पताल का निरीक्षण करने के दौरान डिलेवरी के नाम पर उगाही की शिकायत प्राप्त हुई थी।