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ग्रामीणों को नहीं पता किस अधिकारी ने लिया गोद
Updated Sat, 26 May 2018 12:16 AM IST
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सीखड़। नौ हजार की आबादी वाले बगहां गांव में पेयजल के लिए महज 52 हैंडपंप लगाए गए हैं। जर्जर हो चुके बिजली के तार टूटकर गिरते रहते हैं। उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हालांकि 2017 में इस गांव को सहायक निदेशक मत्स्य ने गोद लिया था लेकिन गांव की दशा में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों को यह भी पता नहीं कि इस गांव को किस अधिकारी ने गोद लिया है।
राज्य पोषण मिशन के तहत जनपद स्तरीय अधिकारियों ने एक-एक गांव को गोद लिया है। इन गांवों को चिकित्सा, बाल पुष्टाहार, आपूर्ति, ग्राम विकास, पंचायत राज, बेसिक शिक्षा विभाग आदि योजनाओं से लाभान्वित कराना है। बगहा गांव में 2007 में तीन करोड़ 85 हजार की लागत से बना 30 बेड का सामुदायिक अस्पताल 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। प्राथमिक विद्यालय बगहा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक जिला पंचायत की ओर से सड़क बनाई गई है। यह सड़क आधी पिच है और आधी पर गिट्टी पड़ी है। इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। गांव में 209 शौचालयों का निर्माण हुआ है। बहुत से लोगों को शौचालय की आवश्यकता है। गांव में 16 आवास दिए गए हैं। 52 हैंडपंप लगे हैं। दो आंगनवाड़ी केंद्र हैं जो भवन के अभाव में प्राथमिक विद्यालय में संचालित होते हैं। प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र के आवास के दरवाजे व खिड़कियां गायब हो गई हैं। स्लम एरिया में जलनिकासी के लिए नाली नहीं बनी है। गांव के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर भेजी गई है। दो प्राथमिक विद्यालय एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। विद्यालयों में बिजली, पानी की है। गांव में इंटरलॉकिंग लगाकर खड़ंजा बनाया गया है। ग्राम प्रधान पारसनाथ सिंह ने बताया कि 2017 में सहायक निदेशक मत्स्य की ओर से गोद लिए गए इस गांव में संबंधित अधिकारी एक बार भी नहीं आए।
ग्रामीण विजयकांत उपाध्याय ने कहा कि प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र की बाउंड्रीवाल, पेयजल और क्षतिग्रस्त आवास के निर्माण की मांग की गई है। अस्पताल में पानी की व्यवस्था नहीं हैै। ग्रामीण सुरेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि अधूरे मार्ग की मरम्मत कराई जानी चाहिए। अस्पताल में दो चिकित्सकों की जगह है लेकिन दो साल से एक ही चिकित्सक नियुक्त हैं। एक और डाक्टर की तैनाती की जाए। जितेंद्र सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण पूरा कराकर उसे चालू कराने की मांग की। करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। दस वर्ष के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज तक अधूरा है। ग्राम प्रधान पारसनाथ सिंह ने कहा कि गांव में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। कार्य योजना बनाकर भेजी गई है। काफी विकास कार्य कराया गया है। अभी बहुत कुछ कराने की जरूरत है। जिस अधिकारी ने गांव को गोद लिया है, वह कभी नहीं आए।
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सहायक निदेशक मत्स्य मुकेश सारंग ने कहा कि गोद लिए गांव बगहा में विकास कार्य कराए जाएंगे। जल्द ही गांव का भ्रमण कर विकास की रूपरेखा बनाई जाएगी।
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राज्य पोषण मिशन के तहत जनपद स्तरीय अधिकारियों ने एक-एक गांव को गोद लिया है। इन गांवों को चिकित्सा, बाल पुष्टाहार, आपूर्ति, ग्राम विकास, पंचायत राज, बेसिक शिक्षा विभाग आदि योजनाओं से लाभान्वित कराना है। बगहा गांव में 2007 में तीन करोड़ 85 हजार की लागत से बना 30 बेड का सामुदायिक अस्पताल 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। प्राथमिक विद्यालय बगहा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक जिला पंचायत की ओर से सड़क बनाई गई है। यह सड़क आधी पिच है और आधी पर गिट्टी पड़ी है। इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है। गांव में 209 शौचालयों का निर्माण हुआ है। बहुत से लोगों को शौचालय की आवश्यकता है। गांव में 16 आवास दिए गए हैं। 52 हैंडपंप लगे हैं। दो आंगनवाड़ी केंद्र हैं जो भवन के अभाव में प्राथमिक विद्यालय में संचालित होते हैं। प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र के आवास के दरवाजे व खिड़कियां गायब हो गई हैं। स्लम एरिया में जलनिकासी के लिए नाली नहीं बनी है। गांव के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर भेजी गई है। दो प्राथमिक विद्यालय एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय है। विद्यालयों में बिजली, पानी की है। गांव में इंटरलॉकिंग लगाकर खड़ंजा बनाया गया है। ग्राम प्रधान पारसनाथ सिंह ने बताया कि 2017 में सहायक निदेशक मत्स्य की ओर से गोद लिए गए इस गांव में संबंधित अधिकारी एक बार भी नहीं आए।
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ग्रामीण विजयकांत उपाध्याय ने कहा कि प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र की बाउंड्रीवाल, पेयजल और क्षतिग्रस्त आवास के निर्माण की मांग की गई है। अस्पताल में पानी की व्यवस्था नहीं हैै। ग्रामीण सुरेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि अधूरे मार्ग की मरम्मत कराई जानी चाहिए। अस्पताल में दो चिकित्सकों की जगह है लेकिन दो साल से एक ही चिकित्सक नियुक्त हैं। एक और डाक्टर की तैनाती की जाए। जितेंद्र सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण पूरा कराकर उसे चालू कराने की मांग की। करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। दस वर्ष के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज तक अधूरा है। ग्राम प्रधान पारसनाथ सिंह ने कहा कि गांव में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। कार्य योजना बनाकर भेजी गई है। काफी विकास कार्य कराया गया है। अभी बहुत कुछ कराने की जरूरत है। जिस अधिकारी ने गांव को गोद लिया है, वह कभी नहीं आए।
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सहायक निदेशक मत्स्य मुकेश सारंग ने कहा कि गोद लिए गांव बगहा में विकास कार्य कराए जाएंगे। जल्द ही गांव का भ्रमण कर विकास की रूपरेखा बनाई जाएगी।