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मिर्च में लग रहा उकठा रोग, किसान परेशान
Updated Sun, 15 Oct 2017 12:39 AM IST
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राजगढ़। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के उन्नतशील किसान सब्जी के खेती के साथ-साथ टमाटर व हरी मिर्च की खेती कर मुनाफा कमाते रहते हैं। परंतु इस बार हरी मिर्च के दामों में उछाल होते ही उकठा रोग लगने से किसानों के सामने बैंकों से लिया गया के सी सी व अन्य ऋण के पैसे को जमा करने की चिंता सताने लगी है।
बताते चलें कि राजगढ़ क्षेत्र सब्जी की खेती का लिये पूरे प्रदेश में जाना जाता है। यहां का टमाटर विदेशों में भी भेजा जाता है। इसीलिये यहां के किसान बैंको एवं साहूकारों से मोटी रकम ब्याज पर लेकर मिर्च, टमाटर, करेला, लौकी, बैगन ,परवल, खीरा आदि की खेती राजगढ़ ब्लॉक के कुड़ी, करौंदा, लूसा, सेमरी, तालर, दरवान, भवानीपुर, निकरिका, राजगढ़, नदिहार, खोरडीह, पड़रवा, चंदनपुर, खतखरिया आदि गांवों के किसान बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करते रहे हैं। इसी के चलते यहां पर दर्जनों प्राइवेट मंडियां प्रतिदिन लगती हैं जिसमें सोनभद्र, वाराणसी, चंदौली, ज्ञानपुर, सिंगरौली, शक्तिनगर के व्यापारी प्रतिदिन सब्जी व हरी मिर्च खरीदने आते हैं। इस बार हरी मिर्च का रेट जैसे ही 40 से 60 रुपये किलो हुआ तभी मिट्टी के अंदर के कीड़े फल से लदे मिर्च के पेड़ों को जड़ से ही काटक र नष्ट कर दे रहे हैं, मिर्च में उकठा रोग इस कदर लगा कि सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी हरी मिर्च सूख गई। जिसने किसानों की कमर ही तोड़ कर रख दी, कोई दवा काम नही कर रही है। फल लगा पेड़ सूख रहा है। जिसके कारण किसानों के सामने मुनाफा को कौन कहे ऋण चुकाने की समस्या खड़ी हो गई है। कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डा. आर पी सिंह ने कहा कि उकठा रोग के लिए दवा निकोटोएड्स व बायोनिमा 15 किलोग्राम प्रति एकड़ पौधों की जड़ों में डाल कर गुड़ाई करने पर उकठा रोग से निजात पाया जा सकता है।
बताते चलें कि राजगढ़ क्षेत्र सब्जी की खेती का लिये पूरे प्रदेश में जाना जाता है। यहां का टमाटर विदेशों में भी भेजा जाता है। इसीलिये यहां के किसान बैंको एवं साहूकारों से मोटी रकम ब्याज पर लेकर मिर्च, टमाटर, करेला, लौकी, बैगन ,परवल, खीरा आदि की खेती राजगढ़ ब्लॉक के कुड़ी, करौंदा, लूसा, सेमरी, तालर, दरवान, भवानीपुर, निकरिका, राजगढ़, नदिहार, खोरडीह, पड़रवा, चंदनपुर, खतखरिया आदि गांवों के किसान बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करते रहे हैं। इसी के चलते यहां पर दर्जनों प्राइवेट मंडियां प्रतिदिन लगती हैं जिसमें सोनभद्र, वाराणसी, चंदौली, ज्ञानपुर, सिंगरौली, शक्तिनगर के व्यापारी प्रतिदिन सब्जी व हरी मिर्च खरीदने आते हैं। इस बार हरी मिर्च का रेट जैसे ही 40 से 60 रुपये किलो हुआ तभी मिट्टी के अंदर के कीड़े फल से लदे मिर्च के पेड़ों को जड़ से ही काटक र नष्ट कर दे रहे हैं, मिर्च में उकठा रोग इस कदर लगा कि सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी हरी मिर्च सूख गई। जिसने किसानों की कमर ही तोड़ कर रख दी, कोई दवा काम नही कर रही है। फल लगा पेड़ सूख रहा है। जिसके कारण किसानों के सामने मुनाफा को कौन कहे ऋण चुकाने की समस्या खड़ी हो गई है। कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डा. आर पी सिंह ने कहा कि उकठा रोग के लिए दवा निकोटोएड्स व बायोनिमा 15 किलोग्राम प्रति एकड़ पौधों की जड़ों में डाल कर गुड़ाई करने पर उकठा रोग से निजात पाया जा सकता है।
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