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झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिले
Updated Wed, 26 Jul 2017 12:22 AM IST
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शेरवां। सोमवार को प्रकृति के मेहरबान होने ही किसानों के चेहरे खिल उठे। खेतों में पर्याप्त पानी हो गया है। सोमवार को एकाएक दोपहर बाद से देर रात तक हुई झमाझम बारिश से प्रकृति पर आधारित खेती करने वाले किसानों के सामने ट्रैक्टर व मजदूरों की किल्लत आ गई है। हालत यह आ गई है कि किसान अब रोपना मजदूरों की तलाश में छत्तीसगढ और झारखंड तक का सफर कर रहे हैं।
मंगलवार को सैकड़ों किसान खेतों में पानी होने के बावजूद भी धान की रोपाई करने से वंचित रह गए। साधन संपन्न किसान जिन्होंने जून माह पहले पखवारे में धान की नर्सरी डाल दी थी उन किसानों ने दूसरे प्रदेशों से रोपना मंगा कर धान की रोपाई भी कर ली। वहीं प्रकृति के सहारे खेती करने वाले लघु किसानों के सामने ट्रैक्टर से जुताई व मजदूरों से रोपाई कराने के लिए समस्या खड़ी हो गई है। गांव के मजदूर बडे़ किसानों की रोपाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं, वहीं लघु किसान मजदूरों के चक्कर में खेतों की मेड़ों पर भटकते हुए दिखाई दे रहे है। किसान रोपनों की खोज में सोनभद्र के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड तक संपर्क कर रहे हैं। रोपना आ भी रहे हैं तो उनका रेट काफी अधिक है। काम करने में वे काफी नखरे भी दिखा रहे हैं। इससे परेशानी बढ़ती जा रही है।
मंगलवार को सैकड़ों किसान खेतों में पानी होने के बावजूद भी धान की रोपाई करने से वंचित रह गए। साधन संपन्न किसान जिन्होंने जून माह पहले पखवारे में धान की नर्सरी डाल दी थी उन किसानों ने दूसरे प्रदेशों से रोपना मंगा कर धान की रोपाई भी कर ली। वहीं प्रकृति के सहारे खेती करने वाले लघु किसानों के सामने ट्रैक्टर से जुताई व मजदूरों से रोपाई कराने के लिए समस्या खड़ी हो गई है। गांव के मजदूर बडे़ किसानों की रोपाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं, वहीं लघु किसान मजदूरों के चक्कर में खेतों की मेड़ों पर भटकते हुए दिखाई दे रहे है। किसान रोपनों की खोज में सोनभद्र के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड तक संपर्क कर रहे हैं। रोपना आ भी रहे हैं तो उनका रेट काफी अधिक है। काम करने में वे काफी नखरे भी दिखा रहे हैं। इससे परेशानी बढ़ती जा रही है।
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