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चंद्रशेखर उर्फ रावण कब-क्यों कैसे गया जेल? रिहाई के बाद एक क्लिक में पढ़े हर अपडेट

Fri, 14 Sep 2018 10:47 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Fri, 14 Sep 2018 10:47 AM IST
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Yogi Sarkar's decision, Chandrasekhar alias Ravana will be released from jail
चंद्रशेखर ऊर्फ रावण

भीम आर्मी प्रमुख एवं सहारनपुर हिंसा के आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण एक वर्ष की अवधि पूरी होने से 48 दिन पूर्व ही रिहा हो गए। पिछले साल दो नवंबर को रावण को रासुका में निरुद्ध किया गया था। तब से तीन-तीन माह बाद रासुका की अवधि बढ़ाई गई थी। छह मुकदमों में रावण को पहले ही जमानत मिल चुकी हैं।  

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सहारनपुर में पांच मई को हुए शब्बीरपुर कांड के विरोध स्वरूप नौ मई को हुई हिंसा के मामले में भीम आर्मी भारत एकता मिशन के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण पर एक नवंबर को रासुका की कार्रवाई की गई थी। उसके बाद से तीन माह पूर्व ही कोर्ट में पैरवी कर उसकी रासुका की अवधि बढ़ाई जाती रही। जुलाई में ही रासुका अवधि को तीन महीने के लिए बढ़ाया गया था। 1 नवंबर 2018 को रासुका की अवधि पूरी होनी थी। लेकिन 48 दिन पूर्व ही रिहाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं। चंद्रशेखर उर्फ रावण के साथ ही शब्बीरपुर के ग्राम प्रधान शिवकुमार और सोनू की भी रासुका को निरस्त कर दिया गया है। शिव कुमार और सोनू की रासुका अवधि 14 अक्तूबर 2018 को पूरी हो रही थी। उन्हें 30 दिन पूर्व रिहा करने के आदेश दिए गए हैं।

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दो नवंबर को लगी भी रावण पर रासुका 
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को सहारनपुर हिंसा के मामले में दर्ज हुए छह मुकदमों में जेल से जमानत मिल चुकी थी। दो नवंबर को उसकी रिहाई की तैयारी की जा रहीं थीं। लेकिन दो नवंबर 2017 को ही  रावण को रासुका में निरुद्ध कर दिया। जिससे दो नवंबर को उसकी रिहाई होने की उम्मीद खत्म हो गई थी। भीम आर्मी सुप्रीमो चंद्रशेखर उर्फ रावण सहारनपुर हिंसा के मामले में  अलग-अलग छह मुकदमे दर्ज होने के बाद फरार हो गया था। पुलिस ने रावण को डलहौजी से छह जून को गिरफ्तार किया था। तभी से वह जेल में बंद था।  

छह लोगों पर लगी थी रासुका 
शब्बीरपुर कांड के बाद हुई सहारनपुर हिंसा और फिर अंबेहटा चांद में राजपूत समाज के युवकों द्वारा किए गए हमले के मामले में दलित एवं राजपूत समाज के तीन-तीन लोगों को रासुका में निरुद्ध किया गया था। जिनमें राजपूत समाज के राजू, सुधीर और सोनू तथा दलित समाज के शब्बीरपुर के ग्राम प्रधान शिवकुमार, गांव के ही सोनू और नौ मई को हुई हिंसा के मामले में चंद्रशेखर उर्फ रावण को रासुका में निरुद्ध किया गया था। राजपूत समाज के तीनों युवकों की पिछले सप्ताह ही कोर्ट ने रासुका को निरस्त कर दिया था। जिन्हें पिछले सप्ताह ही रिहा कर दिया गया था।

यह था पूरा प्रकरण 
पांच मई 2017 को ग्राम शिमलाना में आयोजित महाराणा प्रताप जयंती में शामिल होने के लिए जुलूस निकालकर जा रहे राजपूत समाज के युवकों पर ग्राम शब्बीरपुर से गुजरते समय पथराव कर दिया गया। जिसके बाद राजपूत समाज के लोगों एवं दलित समाज के लोगों में जमकर संघर्ष हुआ। जिसमें राजपूत समाज के एक युवक की मौत हो गई थी। आरोप है कि आक्रोशित राजपूत समाज के लोगों ने दलित समाज के लोगों के दर्जनों घरों में आग लगा दी थी। 

इस घटना के विरोध में नौ मई को भीम आर्मी के कार्यकर्ता गांधी मैदान में एकत्रित हुए। जहां पुलिस ने उन्हें खदेड़ते हुए कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। जिससे भीम आर्मी के कार्यकर्ता भड़क उठे थे। आरोप है कि भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सहारनपुर के सभी रास्तों को बंद कर दिया। इस दौरान आगजनी, तोड़फोड़, मारपीट की गई। यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला किया गया। एक बस, 14 बाइक और कारें जला दी गईं। रामपुर महनिहारन, बड़गांव, सरसावा सभी जगह हिंसक प्रदर्शन किया गया। इस घटना में चंद्रशेखर उर्फ रावण, जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। 

ग्राम शब्बीरपुर में हुए बवाल के मामले में गांव के लोगों का हाल जानने के लिए बसपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती 23 मई को पहुंची और सभा की। आरोप है कि सभा से लौटते हुए लोगों पर अंबेहटा चांद में राजपूत समाज के लोगों ने हमला कर दिया था। जिसमें दलित समाज के एक युवक की मौत हो गई थी।

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भीम आर्मी के चार पदाधिकारियों पर हुआ था ईनाम 
सहारनपुर हिंसा के मामले में चंद्रशेखर उर्फ रावण, जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल पर मुकदमे दर्ज किए गए। उसके बाद सभी फरार हो गए। 

सभी पर 12-12 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया था। बाद में एक-एक कर अन्य सभी तो सभी जेल चले गए। जबकि विनय रतन के यहां कुर्की नोटिस चस्पा किया गया था। जिसने बाद में कोर्ट में सरेंडर किया।

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