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Meerut News: भाव पूर्वक की गई पूजा करती है पाप कर्म का नाश
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
संवाद न्यूज़ एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के पंचमेरु नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान में जापानुष्ठान व मुख्य वेदी में अभिषेक के बाद विधान स्थल पर अभिषेक व शांतिधारा की गई। शांतिधारा प्रवीण जैन, नीता जैन, आकिंचन जैन, अन्मय जैन, मायरा जैन ने की।
शांतिधारा में सहयोग सभी इन्द्रों ने किया। शांतिधारा के बाद पूजन करते हुए श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ किया गया। जिसमें सहस्त्रनाम विधान के 1024 भगवंतों के अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। राजेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अमित जैन, अनंतवीर जैन, राकेश जैन, मुकेश जैन, विजय जैन सहित सभी इंद्रों के साथ मंडल पर अर्घ्य समर्पित कर पुण्य का संचय किया। विधान की क्रियाएं पंडि़त आशीष जैन शास्त्री ने कराई। क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन सराफ ने बताया कि फाल्गुन की अष्टाह्निका में होने वाले होली के मेले की व्यवस्था धूमधाम से की जा रही है। मंदिर के मुख्य द्वार को भव्य रूप से सजाया गया है। होली के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र पर पधार रहे हैं।
तीर्थ क्षेत्र पर विराजमान आचार्य विमर्श सागर महाराज ने प्रवचन में बताया कि भगवान की पूजा करते समय अर्थ पर दृष्टि रखते हुए सिद्ध परमेष्ठी के गुणों को हृदयंगम करते हुए पूजा की जाए तो भक्त का मन हिलोरे लेने लगता है। भगवान के 1008 नाम का स्मरण करने से अनादि काल के निधत्ति, निकाचित जैसे कर्म भी नाश हो जाते हैं। प्रभु की भक्ति निष्काम भाव से होनी चाहिए। भाव पूर्वक की गई पूजा पाप कर्म का नाश करने वाली होती है।
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शास्त्रसभा के बाद आरती एवं भजनों का कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, विनय जैन आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
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हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के पंचमेरु नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान में जापानुष्ठान व मुख्य वेदी में अभिषेक के बाद विधान स्थल पर अभिषेक व शांतिधारा की गई। शांतिधारा प्रवीण जैन, नीता जैन, आकिंचन जैन, अन्मय जैन, मायरा जैन ने की।
शांतिधारा में सहयोग सभी इन्द्रों ने किया। शांतिधारा के बाद पूजन करते हुए श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ किया गया। जिसमें सहस्त्रनाम विधान के 1024 भगवंतों के अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। राजेंद्र जैन, प्रवीण जैन, अमित जैन, अनंतवीर जैन, राकेश जैन, मुकेश जैन, विजय जैन सहित सभी इंद्रों के साथ मंडल पर अर्घ्य समर्पित कर पुण्य का संचय किया। विधान की क्रियाएं पंडि़त आशीष जैन शास्त्री ने कराई। क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन सराफ ने बताया कि फाल्गुन की अष्टाह्निका में होने वाले होली के मेले की व्यवस्था धूमधाम से की जा रही है। मंदिर के मुख्य द्वार को भव्य रूप से सजाया गया है। होली के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र पर पधार रहे हैं।
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तीर्थ क्षेत्र पर विराजमान आचार्य विमर्श सागर महाराज ने प्रवचन में बताया कि भगवान की पूजा करते समय अर्थ पर दृष्टि रखते हुए सिद्ध परमेष्ठी के गुणों को हृदयंगम करते हुए पूजा की जाए तो भक्त का मन हिलोरे लेने लगता है। भगवान के 1008 नाम का स्मरण करने से अनादि काल के निधत्ति, निकाचित जैसे कर्म भी नाश हो जाते हैं। प्रभु की भक्ति निष्काम भाव से होनी चाहिए। भाव पूर्वक की गई पूजा पाप कर्म का नाश करने वाली होती है।
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शास्त्रसभा के बाद आरती एवं भजनों का कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, विनय जैन आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।