{"_id":"5f59221d8ebc3e54db3c90b1","slug":"world-suicide-prevention-day-today-meerut-news-mrt500522780","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिंदगी से करें प्यार... नहीं आएगा आत्महत्या का विचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिंदगी से करें प्यार... नहीं आएगा आत्महत्या का विचार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। जिंदगी बहुत खूबसूरत है, लेकिन यह भी सच है कि इसमें लगातार उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं। कई मौकों पर लोग खुद को बेबस पाते हैं। ऐसे ही एक कमजोर पल में कई बार लोग जिंदगी खत्म करने का फैसला कर बैठते हैं। ऐसे में लोगों को जागरूक करने के लिए 2003 से हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग जिंदगी की अहमियत समझें और खुदकुशी का विचार मन में न लाएं।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल का कहना है कि अगर किसी को खुदकुशी के विचार आ रहे हैं तो किसी करीबी से बात साझा करनी चाहिए। हेल्प लाइन या पेशेवर परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से बात करनी चाहिए। परिवार और दोस्त आसपास रहें। यह एहसास कराना चाहिए कि वह उस व्यक्ति से बहुत प्यार करते हैं और समझते हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि आत्महत्या को रोका जा सकता है। आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत, सांस्कृतिक कारण होते हैं। जिंदगी के प्रति संतुलित नजरिया रखें। अपनी गलतियों से सीखें। नकारात्मक सोच को जरिया न बनाएं।
इस तरह पाएं आत्महत्या के विचार से निजात
- आत्महत्या का विचार आता है तो मदद मांगने में संकोच न करें।
- यह सोचें कि ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती जिसका समाधान न हो।
- सही दिनचर्या अपनाएं अच्छा खाएं, शारीरिक व्यायाम को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
- अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
- खुलकर हंसे, मुस्कुराएं और अपनी बातों को शेयर करें।
- अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।
आत्महत्या के प्रमुख कारण
गंभीर बीमारी का होना
पारिवारिक या करीबियों से कलह
आर्थिक कमजोरी व मानसिक विकार
परीक्षा में असफलता
आत्महत्या के लक्षण
वैसे तो आत्महत्या के कई कारण होते हैं, लेकिन अवसाद को इसका मुख्य कारण बताया जाता है। लोगों के बीच में रहने से कतराना। जिंदगी को अच्छा नहीं बताना। बात-बात में मरने की इच्छा जताना।
विज्ञापन
10 प्रतिशत लोगों को आया था विचार
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में जनवरी 2019 से लेकर मार्च 2020 तक 19228 मरीजों पर स्टडी की गई थी। स्टडी में पता चला था कि कुल मरीजों में डिप्रेशन के शिकार 40 प्रतिशत थे। माइग्रेन के 35, स्कीजोफ्रेनिया के पांच, अल्जाइमर के पांच, अत्यधिक गुस्सा आने के तीन, मिर्गी के चार, हिस्टीरिया तीन व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। करीब 47 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया था। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल का कहना है कि अगर किसी को खुदकुशी के विचार आ रहे हैं तो किसी करीबी से बात साझा करनी चाहिए। हेल्प लाइन या पेशेवर परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से बात करनी चाहिए। परिवार और दोस्त आसपास रहें। यह एहसास कराना चाहिए कि वह उस व्यक्ति से बहुत प्यार करते हैं और समझते हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि आत्महत्या को रोका जा सकता है। आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत, सांस्कृतिक कारण होते हैं। जिंदगी के प्रति संतुलित नजरिया रखें। अपनी गलतियों से सीखें। नकारात्मक सोच को जरिया न बनाएं।
विज्ञापन
इस तरह पाएं आत्महत्या के विचार से निजात
- आत्महत्या का विचार आता है तो मदद मांगने में संकोच न करें।
- यह सोचें कि ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती जिसका समाधान न हो।
- सही दिनचर्या अपनाएं अच्छा खाएं, शारीरिक व्यायाम को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
- अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
- खुलकर हंसे, मुस्कुराएं और अपनी बातों को शेयर करें।
- अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।
आत्महत्या के प्रमुख कारण
गंभीर बीमारी का होना
पारिवारिक या करीबियों से कलह
आर्थिक कमजोरी व मानसिक विकार
परीक्षा में असफलता
आत्महत्या के लक्षण
वैसे तो आत्महत्या के कई कारण होते हैं, लेकिन अवसाद को इसका मुख्य कारण बताया जाता है। लोगों के बीच में रहने से कतराना। जिंदगी को अच्छा नहीं बताना। बात-बात में मरने की इच्छा जताना।
विज्ञापन
10 प्रतिशत लोगों को आया था विचार
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में जनवरी 2019 से लेकर मार्च 2020 तक 19228 मरीजों पर स्टडी की गई थी। स्टडी में पता चला था कि कुल मरीजों में डिप्रेशन के शिकार 40 प्रतिशत थे। माइग्रेन के 35, स्कीजोफ्रेनिया के पांच, अल्जाइमर के पांच, अत्यधिक गुस्सा आने के तीन, मिर्गी के चार, हिस्टीरिया तीन व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। करीब 47 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया था। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी।