World Suicide Prevention Day: जिंदगी से करें प्यार... नहीं आएगा खुदकुशी का विचार, करीबी से करें मन की बात
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मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल का कहना है कि अगर किसी को खुदकुशी के विचार आ रहे हैं तो किसी करीबी से बात साझा करनी चाहिए। हेल्प लाइन या पेशेवर परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से बात करनी चाहिए। परिवार और दोस्त आसपास रहें। यह एहसास कराना चाहिए कि वह उस व्यक्ति से बहुत प्यार करते हैं और समझते हैं।
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि आत्महत्या को रोका जा सकता है। आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत, सांस्कृतिक कारण होते हैं। जिंदगी के प्रति संतुलित नजरिया रखें। अपनी गलतियों से सीखें। नकारात्मक सोच को जरिया न बनाएं।
- - आत्महत्या का विचार आता है तो मदद मांगने में संकोच न करें।
- - यह सोचें कि ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती जिसका समाधान न हो।
- - सही दिनचर्या अपनाएं अच्छा खाएं, शारीरिक व्यायाम को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
- - अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
- - खुलकर हंसे, मुस्कुराएं और अपनी बातों को शेयर करें।
- - अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।
आत्महत्या के प्रमुख कारण
- गंभीर बीमारी का होना
- पारिवारिक या करीबियों से कलह
- आर्थिक कमजोरी व मानसिक विकार
- परीक्षा में असफलता
आत्महत्या के लक्षण
वैसे तो आत्महत्या के कई कारण होते हैं, लेकिन अवसाद को इसका मुख्य कारण बताया जाता है। लोगों के बीच में रहने से कतराना। जिंदगी को अच्छा नहीं बताना। बात-बात में मरने की इच्छा जताना।
10 प्रतिशत लोगों को आया था विचार
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में जनवरी 2019 से लेकर मार्च 2020 तक 19228 मरीजों पर स्टडी की गई थी। स्टडी में पता चला था कि कुल मरीजों में डिप्रेशन के शिकार 40 प्रतिशत थे।
माइग्रेन के 35, स्कीजोफ्रेनिया के पांच, अल्जाइमर के पांच, अत्यधिक गुस्सा आने के तीन, मिर्गी के चार, हिस्टीरिया तीन व नशे की लत के पांच फीसदी मरीज निकले। करीब 47 प्रतिशत को नींद न आने की भी बीमारी थी। 10 फीसदी के मन में आत्महत्या का विचार आया था। 15 फीसदी में घबराहट या फोबिया मिला। दो फीसदी के व्यवहार में दिक्कत थी।