विश्व नर्सिंग दिवस: नर्स हैं संग... इसलिए लड़ पाए कोरोना से जंग, जान जोखिम में डालकर निभा रहीं जिम्मेदारी, आज हुआ सम्मान
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर मेरठ में आज अमर उजाला और लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में नर्सों का सम्मान किया गया।
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कोरोना की तीन लहर आ चुकी हैं और चौथी की आशंका है। इस महामारी में चिकित्सीय स्टाफ ने अपना सब कुछ झोंका है। कोरोना के इलाज और टीकाकरण में नर्सों ने बेहद अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने जान जोखिम में डालकर पूरे समर्पण के साथ मरीजों का इलाज करने में मदद की। अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ की। आज अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस है। इस दिन इनकी सेवा को याद करना बहुत जरूरी है, क्योंकि बिना नर्सिंग स्टाफ के इस लड़ाई को लड़ना नामुमकिन था और आगे की चुनौती में भी इनका सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
फ्लोरेंस नाइटिंगेल को समर्पित है दिवस
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाने की शुरुआत साल 1974 से हुई थी। यह दिन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल को समर्पित है। उनकी याद में ही 12 मई को नर्स दिवस मनाया जाता है। उन्होंने जिंदगीभर बीमारों की सेवा की। उनका समर्पण सबके लिए प्रेरणादायक रहा।
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अमर उजाला मेडिकल कॉलेज में आज करेगा नर्सों का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर मेरठ में आज अमर उजाला और लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में नर्सों का सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. संगीता गुप्ता मौजूद रहीं।
विशिष्ट अतिथि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता रहे। इनके अलावा प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश राणा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धीरज राज और नर्सिंग कॉलेज की प्रधानाचार्य मार्टिना देवी भी मौजूद रहीं। सम्मानित होने वाली नर्सें छात्र-छात्राओं को पेशे को बेहतर करने के बारे में भी बताए।
बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए घर पर मेड रखकर मैंने कोरोनारोधी टीकाकरण में लगन के साथ ड्यूटी की। - शर्ली भंडारी, नर्स
मेरी पहली पोस्टिंग मेडिकल कॉलेज में हुई तभी कोरोना आ गया। मैं खुद बीमार थी, लेकिन ड्यूटी नहीं छोड़ी। -मनीषा, नर्स
ढाई साल की बेटी मां के पास छोड़कर कोविड ड्यूटी की। मरीजों की सेवा सबसे बड़ी ड्यूटी है। -सुनीता यादव, नर्स
मैंने अपने दो छोटी छोटी बेटियों को घर पर छोड़कर कोरोना के दौरान कोविड वार्ड में लगन और हिम्मत से ड्यूटी की। - शिल्पी, नर्स