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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस: बचपन में ही नजर आने लगते हैं लक्षण, रहें सतर्क

Fri, 02 Apr 2021 12:17 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 02 Apr 2021 12:17 AM IST
सार

  • ऑटिज्म जिसे स्वलीनता भी कहते हैं एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसके शिकार बच्चे अपने आप में खोए से रहते हैं

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World Autism Awareness Day : Symptoms start appearing in childhood
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

ऑटिज्म (स्वलीनता), एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिससे ग्रस्त लोगों में व्यवहार से लेकर कई तरह की दिक्कतें होती हैं। ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण 1-3 साल के बच्चों में नजर आते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया जाता है।
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मेडिकल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल ने बताया कि इस बीमारी के लिए अनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कई कारण जिम्मेदार होते हैं। इस बीमारी से ग्रसित बच्चे अपने आप में खोए से रहते हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि यह रोग बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है।
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सामान्य तौर पर ऐसे बच्चों को उदासीन माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में ये लोग अद्भुत प्रतिभा वाले होते हैं। माना जाता है कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से यह दिक्कत होती है। कई बार गर्भावस्था के दौरान खानपान सही नहीं होने से भी बच्चे को ऑटिज्म का खतरा हो सकता है।
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मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली की वजह से परिवारों में एकजुटता का भाव बहुत कम हो गया है। बच्चों में असुरक्षा का एहसास बढ़ रहा है। एक बच्चे को अपने माता-पिता का समय और परिवार के बुजुर्गों का ध्यान और प्यार चाहिए होता है। इससे वह सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करता है। बच्चों में खिलौने, किताबें और घर में कुछ रोचक खेल-खेलने की आदत डालनी चाहिए। 

बच्चे के विकास की गति होती है धीमी 
जिन बच्चों में ऑटिज्म की शिकायत होती है, उनके विकास की गति धीमी होती है। उनका नाम पुकारने पर भी वो कोई जवाब नहीं देते हैं। आमतौर पर छह माह के बच्चे मुस्कुराना, उंगली पकड़ना और आवाज पर प्रतिक्रिया देना सीख लेते हैं, लेकिन जिन बच्चों में ऑटिज्म की शिकायत होती है वह ऐसा नहीं कर पाते हैं। इसके बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान नियमित तौर पर मेडिकल चेकअप कराना चाहिए। बच्चे के पैदा होने से छह माह तक उनकी आदतों पर गौर करें। 

ऑटिज्म
- हर सौ में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार हो रहा है।
- करीब 20 फीसदी ऑटिज्म के मामलों के लिए आनुवांशिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
- लगभग 80 फीसदी मामलों के लिए पर्यावरण वंशानुगत कारण जिम्मेदार होते हैं।
- सामान्यत: 12 से 13 माह के बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण नजर आने लगते हैं।

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