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रविवार को शहर की सफाई की भी छुट्टी
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मेरठ। त्योहारों के साथ ही अब अवकाश के दिनों में भी शहर की सफाई व्यवस्था की छुट्टी हो जाती है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि शनिवार और रविवार को शहर की सफाई व्यवस्था ठप रही। सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नगर निगम की गाड़ियों से केवल कूड़ाघरों से ही कूड़ा उठाया गया है। ऐसे में शहर में लगभग एक हजार मीट्रिक टन कूड़ा जमा हो गया।
शहर से प्रतिदिन एक हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। शहर की सफाई की जिम्मेदारी लगभग तीन हजार सफाई कर्मचारियों के कंधे पर है। इनकी निगरानी के लिए भी 25-30 सफाई इंस्पेक्टर और सफाई नायक भी लगाए गए हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भी शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लेने और सफाई को व्यवस्थित कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन त्योहारों और अवकाश के दिनों में सफाई व्यवस्था को देखने वाला कोई नहीं रहता है, जिसके चलते शहर गंदगी के ढेर पर बैठ जाता है।
शनिवार को अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कारण सफाई व्यवस्था ठप रही थी। रविवार को भी अफसरों के अवकाश के चलते शहर में सफाई नहीं हो सकी। पार्षद पहले भी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि सफाई कर्मचारी काम पर तो आते हैं, लेकिन हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। रविवार को भी यही हाल रहा। शहर में कुछ ही जगहों पर सफाई कर्मचारी नजर आए। ढलावघरों से तो निगम की गाड़िया कूड़ा उठाती दिखीं, लेकिन गलियों और मुख्य मार्गों पर कचरे के ढेर ही नजर आए।
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सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी
सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी है कि वह अपने अपने क्षेत्र की सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराएं। जो सफाई कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं उनका वेतन काटने की कार्यवाही करें। - डा. गजेन्द्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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शहर से प्रतिदिन एक हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। शहर की सफाई की जिम्मेदारी लगभग तीन हजार सफाई कर्मचारियों के कंधे पर है। इनकी निगरानी के लिए भी 25-30 सफाई इंस्पेक्टर और सफाई नायक भी लगाए गए हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भी शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लेने और सफाई को व्यवस्थित कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन त्योहारों और अवकाश के दिनों में सफाई व्यवस्था को देखने वाला कोई नहीं रहता है, जिसके चलते शहर गंदगी के ढेर पर बैठ जाता है।
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शनिवार को अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कारण सफाई व्यवस्था ठप रही थी। रविवार को भी अफसरों के अवकाश के चलते शहर में सफाई नहीं हो सकी। पार्षद पहले भी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि सफाई कर्मचारी काम पर तो आते हैं, लेकिन हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। रविवार को भी यही हाल रहा। शहर में कुछ ही जगहों पर सफाई कर्मचारी नजर आए। ढलावघरों से तो निगम की गाड़िया कूड़ा उठाती दिखीं, लेकिन गलियों और मुख्य मार्गों पर कचरे के ढेर ही नजर आए।
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सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी
सफाई इंस्पेक्टरों की ड्यूटी है कि वह अपने अपने क्षेत्र की सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराएं। जो सफाई कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं उनका वेतन काटने की कार्यवाही करें। - डा. गजेन्द्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी